अस्पताल के वार्ड में तादाद से ज्यादा मरीज और डॉक्टरों पर अतिरिक्त काम के दबाव को लापरवाही का आधार नहीं माना जा सकता है और ना ही इन मुद्दों का झांसा देकर मुआवजा देने से बचा जा सकता है। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में लापरवाही से एक शख्स की पत्नी की मौत के मामले में दिल्ली उपभोक्ता पैनल ने यह टिप्पणी करते हुए 11.05 लाख के मुआवजा का आदेश दिया है।
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live surgery at safdarjung
दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग के सदस्य एन.पी कौशिक ने मामले में सुनवाई के दौरान डीजीएचएस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए 42 वर्षीय महिला की मौत के मामले में घोर लापरवाही की बात कही।उन्होंने कहा कि जब मरीज की हालत इतनी नाजुक थी तो उसे आर्ईसीयू और वेंटिलेटर पर क्यों शिफ्ट नहीं किया गया।
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कोर्ट, कंज्यूमर फोरम
- फोटो : फाइल फोटो
वहीं आयोग ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और दिल्ली मेडिकल काउंसिल की मेडिकल रिपोर्ट में भी अस्पताल की लापरवाही दिखाई गई। जिसके आधार पर आयोग ने सफदरजंग अस्पताल को इलाज में कोताही बरतने का दोषी ठहराते हुए मृतका के परिवार को 11.05 लाख का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
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उपभोक्ता आयोग
- फोटो : DEMO Pics
सुधीर वर्मा अपनी पत्नी किरण को 22 अप्रैल 2006 को मोटापे और मधुमेह की बीमारी थी। किसी निजी अस्पताल में इलाज के दौरान वह अपनी पत्नी को इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी के पेट में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था और अस्पताल में उनकी पत्नी को भर्ती होने के 40 घंटें बाद तक पर्याप्त उपचार नहीं दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया की डॉक्टरों की लापरवाही के कारण चौथे दिन उनकी पत्नी की मौत हो गई।