लंबी जद्दोजहद और कानूनी लड़ाई के बाद पूर्व मुख्यमंत्री स्व. एनडी तिवारी ने रोहित को अपना बेटा माना था और उनकी मां उज्ज्वला से सबके समक्ष 88 साल की उम्र में विवाह करके इस गुमनाम रिश्ते को पवित्र रिश्ते का नाम दिया। मंगलवार को उन्हीं रोहित शेखर की कथित दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। रोहित की जिंदगी जिस तरह पहेली भरी रही थी, अब उनकी मौत भी एक रहस्य बन गई है। जिस संदिग्ध अवस्था में उनका शव मिला है उससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए रोहित शेखर की जिंदगी के के बारे में सबकुछ...
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पहेली थी जिंदगी, मौत बनी रहस्य, पढ़िए एनडी तिवारी के बेटे रोहित के बारे में सबकुछ
Wed, 17 Apr 2019 02:41 PM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 17 Apr 2019 02:41 PM IST
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रोहित शेखर का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
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एनडी तिवारी के पुत्र रोहित शेखर तिवारी का निधन (फाइल फोटो)
- फोटो : Social Media
रोहित शेखर का प्रोफाइल
नाम : रोहित शेखर तिवारी
पिता : स्व. नारायण दत्त तिवारी
माता : उज्ज्वला तिवारी
पत्नी : अपूर्वा
जन्म : 1979
मृत्यु : 16 अप्रैल 2019
उम्र : 40 वर्ष
जन्म स्थान : दिल्ली
नाम : रोहित शेखर तिवारी
पिता : स्व. नारायण दत्त तिवारी
माता : उज्ज्वला तिवारी
पत्नी : अपूर्वा
जन्म : 1979
मृत्यु : 16 अप्रैल 2019
उम्र : 40 वर्ष
जन्म स्थान : दिल्ली
दिग्गज कांग्रेसी नेता रहे एनडी तिवारी के पुत्र रोहित शेखर का जीवन पहचान पाने, लावारिस कहे जाने के दंश और पिता के जीवित होने के बावजूद अनाथ महसूस किए जाने की पीड़ा के बीच न्याय पाने के संघर्ष को समर्पित रहा। वे स्वयं अपने हालात को त्रिशूल और लावारिस फिल्मों की कहानी जैसा बताया भी करते थे।
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रोहित शेखर तिवारी (फाइल फोटो)
राजनीति में कॅरिअर बनाने की इच्छा कभी बीजेपी, कभी सपा और कभी कांग्रेस से जुड़ने के असमंजस के बीच परवान नहीं चढ़ पाई। अभी छह दिन पहले उन्होंने अंतत: कांग्रेस से जुड़ने की सार्वजनिक घोषणा की तो अचानक काल ने उन्हें आ घेरा। कैसा विचित्र संयोग है कि जिस पिता ने छह दशक शिखर की राजनीति की उनके पुत्र का राजनीतिक सफर कुछ दिन का रहा। अपने विवाह की सालगिरह से लगभग एक माह पहले ही उनका निधन हो गया।
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- फोटो : amar ujala
रोहित ने जीवन के 19 बेहतरीन वर्ष केवल मां को उनका सम्मान और खुद को पिता के प्यार का अधिकार दिलाने के संघर्ष में बिताए। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2014 में उन्हें यह अधिकार मिला तो पिता का प्यार पाने से ज्यादा उनकी देखरेख और सेवा में बिता दिया।