भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 71वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन साल 1948 में नाथूराम गोडसे ने बापू की गोली मारकर हत्या कर दी थी। शाम के वक्त जब बापू बिड़ला भवन में प्रार्थना सभा से उठकर जा रहे थे उस वक्त ही गोडसे ने अपनी सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल से एक के बाद एक तीन गोलियां दागकर उनका सीना छलनी कर दिया। गोडसे को गांधी जी की हत्या के तुरंत बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद पूरा केस शिमला की अदालत में चला। हालांकि हत्या के बाद एक ऐसा भी समय था जब बापू के बेटे देवदास गांधी गोडसे से मिलने भी गए थे तब गोडसे ने उन्हें कुछ बातें बतायी थीं। आगे की स्लाइड्स में जानिए कि दोनों के बीच क्या बातें हुई थीं।
महात्मा गांधी पुण्यतिथिः हत्या के बाद नाथूराम से मिलने गए थे बापू के बेटे, गोडसे ने कही थी ये बात
करीब डेढ़ साल बाद 15 नवंबर 1949 को गोडसे को बापू की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई। हत्या के बाद गांधी के बेटे देवदास गांधी नाथूराम से मिलने पहुंचे। इस प्रसंग के बारे में गोडसे के भाई ने अपनी किताब 'मैंने गांधी वध क्यों किया' में लिखा है। उन्होंने लिखा है, 'देवदास (गांधी के बेटे) शायद इस उम्मीद में आए होंगे कि उन्हें कोई वीभत्स चेहरे वाला, गांधी के खून का प्यासा हत्यारा नजर आएगा, लेकिन नाथूराम सहज और सौम्य थे। उनका आत्मविश्वास बना हुआ था। देवदास ने जैसा सोचा होगा उससे एकदम उलट।'
देवदास गांधी से नाथूराम ने कही ये बात
जब गांधी के बेटे देवदास नाथूराम गोडसे से जेल में मिलने पहुंचे तो गोडसे उन्हें बताया था कि तुम्हारे पिताजी की मृत्यु का मुझे बहुत दुख है। नाथूराम ने देवदास को बताया, मैं नाथूराम विनायक गोडसे हूं। आज तुमने अपने पिता को खोया है। मेरी वजह से तुम्हें दुख हुआ है। तुमको और तुम्हारे परिवार को जो दुख हुआ है, इसका मुझे भी बहुत दुख है। कृपया मेरा विश्वास करो, मैंने यह काम किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते नहीं किया है, न तो मुझे तुमसे कोई द्वेष है और न ही कोई खराब भाव।
नाथूराम गोडसे के आदर्श थे महात्मा गांधी
आपको यह अजीब जरूर लगेगा लेकिन यही सच है कि नाथूराम गोडसे के पहले आदर्श महात्मा गांधी ही थे। नाथूराम को पहली बार जेल गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन की वजह से ही हुई थी। लेकिन गांधी के प्रति प्यार और आदर देश के बंटवारे और आजादी के बाद कटुता में बदल गई। हालांकि नाथूराम 1937 में वीर सावरकर के संपर्क में आ चुका था और उन्हें अपना गुरु मान लिया था।
नाथूराम गोडसे का बयान
नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) ने 8 नवम्बर 1948 को नब्बे पेज का बयान अदालत के सामने पढ़ा था। नाथूराम गोडसे ने कहा था कि मैंने वीर सावरकर और गांधी जी के लेखन और विचार का गहराई से अध्ययन किया है। चूंकि मेरी समझ में पिछले तीस सालों में भारतीय जनता की सोच और काम को किसी भी और कारकों से ज्यादा इन दो विचारों ने गढ़ने का काम किया है। इन सभी सोच और अध्ययन ने मेरा विश्वास पक्का किया कि बतौर राष्ट्रभक्त और विश्व नागरिक मेरा पहला कर्तव्य हिन्दुत्व और हिन्दुओं की सेवा करना है। 32 सालों से इकट्ठा हो रही उकसावेबाजी, नतीजतन मुसलमानों के लिए उनके आखिरी अनशन ने आखिरकार मुझे इस नतीजे पर पहुंचने के लिए प्रेरित किया कि गांधी का अस्तित्व तुरंत खत्म करना ही चाहिए।