लग्जरी विंटेज का शौक बना दीवानगी, दिग्गज भी हैं इनके मुरीद
विंटेज गाड़ियों के शौकीनों की कमी नहीं है। यह ऐसी गाड़ियां हैं जो सड़कों से गुजरती हैं तो नजरें हटने का नाम नहीं लेतीं। इन गाड़ियों का शौक हर किसी के बस की बात नहीं है। जिन्हें शौक है वो अपनी जान से ज्यादा इनको संभालकर रखते हैं। ऐसे ही हैं फरीदाबाद के गुरमुख सिंह। इनके पास वर्ष 1911 से 1980 तक की विंटेज बाइक और कारें हैं।
लग्जरी विंटेज का शौक बना दीवानगी, दिग्गज भी हैं इनके मुरीद
14 साल की उम्र में शुरू हुआ यह शौक आज 41 साल की उम्र में दीवानगी बन गया है। सेक्टर-21 में रहने वाले गुरमुख सिंह को विंटेज रखने का ही शौक नहीं है बल्कि नए दौर की आधुनिक व आलीशान गाड़ियों के मुकाबले पुरानी गाड़ियों को खड़ा करने का जुनून भी है।
लग्जरी विंटेज का शौक बना दीवानगी, दिग्गज भी हैं इनके मुरीद
इसके लिए उन्होंने अपने घर को ही वर्कशॉप बना डाला है। उनके पास आज 62 विंटेज बाइक और 12 कारें हैं। इतना ही एशिया में अकेली बची टाइगर 70 बाइक को गुरमुख ने संभालकर रखा है, जिसको नया लुक देने की कवायद चल रही है।
लग्जरी विंटेज का शौक बना दीवानगी, दिग्गज भी हैं इनके मुरीद
इसके अलावा बीएमडब्ल्यू की आर-12 बाइक जो पूरे देश में सिर्फ दो बताई जाती हैं, उनमें से एक गुरमुख अपने पास होने का दावा करते हैं। इस बाइक को 30 के दशक में अंग्रेज इंग्लैंड से भारत लेकर आए थे। गुरमुख विंटेज कार रैलियों में एक हजार से ज्यादा ट्रॉफियां जीत चुके हैं। अब उन्हें जज की भूमिका के लिए पहचाना जाता है। वर्ष 2002 में हैरिटेज मोटरिंग क्लब के फाउंडर सदस्य बने थे।
लग्जरी विंटेज का शौक बना दीवानगी, दिग्गज भी हैं इनके मुरीद
ऐसे हुआ लगाव-
गुरमुख ने बताया कि 1980 में उनके चाचा के पास 1952 मॉडल बीएसए (इंग्लैंड) की बाइक थी। जब वे अपने चाचा के साथ बाइक पर बैठ कर सड़क पर निकलते थे तो लोग उनको हैरानी से देखते थे। उस समय राजा जैसा अनुभव होता था। यहीं से विंटेज बाइक और कारों के प्रति लगाव पैदा हो गया। दादा को कारों का तो चाचा को बाइकों का शौक था।