राहुल गांधी ने 'पंजा' लहराने के लिए चली थी ये 6 चाल जो हो गई फेल, 'चौकीदार' बना सिरदर्द
चौकीदार चोर है का नारा- अपने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान चौकीदार चोर है का नारा लगाने और लगवाने वाले राहुल गांधी को अपना यही नारा भारी पड़ गया। माना जा रहा है कि इस नारे ने निचले तबके को नाराज कर दिया। राहुल के इसी नारे का नरेंद्र मोदी ने बेहद चतुराई से प्रयोग कर इसे जनभावनाओं से तो जोड़ा ही पूरे देश को चौकीदार बताकर उनके इस नारे को ही फेल कर दिया। ये नारा कामयाब होता तो शायद कांग्रेस की ऐसी दुर्गति न होती।
गठबंधन के चक्कर में की देरी- कांग्रेस ने गठबंधन के चक्कर में कई राज्यों जैसे हरियाणा, दिल्ली व अन्य राज्यों में उम्मीदवारों के नाम घोषित करने में देर कर दिया। दिल्ली जैसे राज्य में आप से गठबंधन न हो पाने से भी कार्यकर्ताओं का उत्साह काफी कम हुआ। पूरे देश में कांग्रेस पार्टी से गठबंधन के लिए बड़ी-बड़ी पार्टियां भी तैयार नहीं थीं। यूपी में सपा-बसपा के साथ कांग्रेस चाहकर भी गठबंधन नहीं कर सकी।
अंतिम समय में खोला प्रियंका का पत्ता, नहीं चला जादू- प्रियंका गांधी को औपचारिक राजनीति में उतारने में कांग्रेस ने काफी देर कर दी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रियंका को साल-दो साल पहले ही कांग्रेस ले आती तो शायद कुछ और ही परिणाम होते। इसके साथ ही प्रियंका के नाम की चर्चा होने के बावजूद उन्हें वाराणसी से या फिर अन्य किसी सीट से चुनाव न लड़वाना भी कांग्रेस के खिलाफ गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का जादू मतदाताओं पर नहीं चला। पूर्वांचल की अधिकांश सीटों पर कांग्रेस कहीं भी सीधी लड़ाई में नहीं नजर आई। हर जगह तीसरे नंबर पर ही संघर्ष करती रही। प्रियंका का रोड शो भी वैसा ही रहा, जिस तरह पहले तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या राहुल गांधी का रोड शो रहा था। उनके रोड शो में भी भीड़ जुटी, लेकिन यह भीड़ मतों में नहीं बदल पाई।
नहीं बन पाए सशक्त विपक्ष का चेहरा- राहुल गांधी विपक्ष के लिए सशक्त चेहरा नहीं बन पाए। राहुल वो विकल्प नहीं बन पाए जिसके लिए भारत की जनता सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक कराने वाले नरेंद्र मोदी नकार दे। चाहे समाज का निचला तबका हो या उच्च वर्ग सभी यही कहते रहे कि 'मोदी नहीं तो कौन'? यानी लोगों को नरेंद्र मोदी के सामने कोई ऐसा चेहरा नहीं दिखा जो देश का पीएम बन सके।