यूपी के लोकसभा चुनाव के नतीजों में इसबार काफी उल्टफेर देखने को मिला। लगातार कई बार से चुनाव जीत रहे नेता इस बार हार गए। हारने वालों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव, रालोद सुप्रीमो अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी और शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा प्रमुख रहे। खास बात ये रही कि यूपी की जनता ने इस बार परिवारवाद के उपर बढ़कर विकास को प्रमुखता दी तो ऐसे नतीजे देखने को मिले।
यूपी के 15 बड़े नेताओं में से 10 उलटफेर के शिकार, राजनीति से ज्यादा जिनपर हावी रहा वंश
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मुजफ्फर नगर अजीत चौधरी, रालोद (चौधरी चरण के सिंह के बेटे), 07 बार सांसद रहे।
बागपत से 06 बार चुने गए। 2014 में मोदी लहर में हारे थे। इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। बागपत सीट की विरासत अपने बेटे को सौंपकर मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने पहुंचे चौधरी अजित सिंह भाजपा के डॉ. संजीव बालियान से हार गए।
बागपत जयंत चौधरी, रालोद (अजीत के बेटे)
2009 में मथुरा से चुने गए। 2014 में मिली हार। 2019 में फिर से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बागपत सीट पर उन्हें भाजपा के डॉ. सत्यपाल सिंह ने हराया। हालांकि दोनों जीत-हार में बेहद नजदीकी मुकाबला देखने को मिला। दोनों तरफ के नेताओं और कार्यकर्ताओं की सांसें अटकी रहीं।
मैनपुरी (मुलायम सिंह यादव, सपा)
06 बार सांसद चुने गए। 2014 की मोदी लहर में भी जीते थे। इस बार भी सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने मोदी की सुनामी में भी मैनपुरी का किला बचा लिया। मुलायम ने कुल पांचवीं और लगातार चौथी जीत दर्ज की। हालांकि जीत के चौके में 2014 के मुकाबले वोटों का अंतर कम रहा।
आजमगढ़ अखिलेश यादव, सपा (मुलायम के बेटे)
कन्नौज से 2000 उपचुनाव, 2004, 2009 में जीते। मुख्यमंत्री बने तो छोड़ी सीट। इस बार पिता की विरासत संभाली और जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाने वाली आजमगढ़ लोकसभा सीट पर यूं तो भाजपा ने भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को उतार कर जातीय समीकरण के आधार पर सेंध लगाने की पूरी कोशिश की, लेकिन अखिलेश अपनी साख बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार निरहुआ को भारी अंतर से हरा कर अपनी जीत सुनिश्चित की है।