सीलिंग कार्रवाई के विरोध में भाजपा समर्थित व्यापारी नेताओं ने बुधवार को रामलीला मैदान से केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी। व्यापारियों ने कहा कि वह सत्ता में भेजना जानते हैं तो सत्ता से बेदखल करना भी उन्हें आता है।सीलिंग से बचाने का उपाय नहीं करने का खामियाजा उन्हें 2019 में भुगतना पड़ेगा। सरकार व्यापारियों के सब्र की परीक्षा न ले, उनके सब्र का बांध टूट गया है। महारैली में व्यापारी नेताओं के साथ-साथ कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने सीलिंग के मामले में सीधे तौर पर केंद्र सरकार को ललकारा।
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- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि व्यापारियों को भाजपा का समर्थक माना जाता है। जबकि भाजपा राज में ही उनका कारोबार ठप्प किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता से बड़ा कोई नहीं है, लेकिन कुछ मंत्री स्वयं को खुदा समझ रहे है। वे सीलिंग कार्रवाई बंद कराने की दिशा में कोई पहल नहीं कर रहे है। इस दौरान मंच पर भाजपा के कई नेता भी मौजूद थे। इस दौरान व्यापारियों ने एक प्रस्ताव पास किया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से मांग की गई कि किसी भी व्यापारी के खिलाफ करवाई करने से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन अवश्य किया जाए।
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दिल्ली को सीलिंग से तुरंत राहत देने के लिए कम से कम एक साल का बिल संसद के चालू सत्र में लाया जाए। वहीं मुख्यमंत्री विधानसभा के चालू सत्र में सीलिंग पर बिल पारित कर केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजे। जो दुकानें सील की गई है उन्हें तुरंत खुलवाया जाए। साथ ही डीसीलिंग की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाए। केंद्र सरकार 31 दिसंबर को कट ऑफ डेट मानकर एक आम आदमी योजना लेकर आए।
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रामलीला मैदान में सीलिंग के विरोध में हुई महारैली में व्यापारियों के साथ-साथ उनके परिजनों ने भी जमकर भड़ास निकाली। व्यापारियों ने मंच से सरकार को कोसा। जबकि परिजनों ने मैदान में बैठकर सरकार पर निशाने साधे। महिलाओं ने कहा कि सीलिंग अभियान शुरू होने के बाद से खाने का भी संकट पैदा हो गया है। शादी ब्याह रुक गए हैं। वर्ष 1975 से सब ठीक चल रहा था, लेकिन अब अचानक कारोबार बंद होने की नौबत आ गई।