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ट्रेड फेयर : वादियों के हुनर को संस्कृति में पिरोता हिमाचल प्रदेश पेवेलियन, देखें PICS

Thu, 16 Nov 2017 10:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 16 Nov 2017 10:44 AM IST
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in international trade fair himachal pradesh showed it's talent, view pics
international trade fair - फोटो : G. pal

हिमालय की वादियों के हुनर को संस्कृति में पिरोकर दर्शकों तक लेकर आने वाला हिमाचल प्रदेश पेवेलियन दर्शकों के मन को बहुत लुभा रहा है। प्रगति मैदान के हैंगर नम्बर 4 में बनाए गए हिमाचल प्रदेश पेवेलियन में हिमाचल के अलग-अलग इलाकों में सदियों से पहन रहे हुनर की कला का बेजोड़ प्रदर्शन किया गया है। यहां हिमाचल की लोक संगीत कला से लेकर आधुनिक युग के इंटरनेट की दुनिया के जुड़ाव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश किया गया है।

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international trade fair - फोटो : G. pal

हिमाचल प्रदेश पेवेलियन को हिमाचल की वादियों के दृश्यों से सराबोर खूबसूरत प्रदर्शनी से सजाकर दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। पेवेलियन में घुसते ही दर्शकों को यहां हिमाचल के लोक संगीत की प्राचीन कालीन कला बजंतरी की धुन सुनाई देती है। बजंतरी हिमाचल की एक ऐसी कला है जो सिरमोर इलाके में सदियों से पनप रही है।

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international trade fair - फोटो : G. pal

पेवेलियन में इस कला से दर्शकों को अवगत करवा रहे कलाकार ने बताया कि वह बजंतरी को पिछले 50 सालों से जीवंत बनाए हुए हैं। उनसे पहले उनके पूर्वज इस कला के जरिये हिमाचल की संस्कृति को बढ़ावा देते थे। बजंतरी में वह नगाडा, ढोल और शहनाई समेत पांच संगीत उपकरणों को एक साथ बजाते हैं। उनके इस हुन को जब नौ लोग मिलकर पेश करते हैं उसे नौगत कहा जाता है। हिमाचल प्रदेश पेवेलियन में लोग हिमाचल की बजंतरी कला धुन पर मदमस्त होते दिखाई दिए, जिन्होंने इस मौके का जमकर लुत्फ उठाया।

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international trade fair - फोटो : G. pal

हथौड़े और छेनी से जीवंत हस्तकला 
वहीं पेवेलियन में हस्तकला से लकड़ी पर हथौड़े और छेनी की मदद से भगवान गणेश की प्रतिमा उकेरने वाले कलाकार दल्लूराम जी ने बताया कि वह पिछले 40 सालों से इस हुनर को अपनी नई पीढिय़ों को सिखा रहे हैं। उन्होने बताया कि वह एक पतली हथौड़ी और कई प्रकार की छेनियों के प्रयोग से लकड़ी के सपाट तख्ते पर बेहतरीन चित्रकारी करने में माहिर हैं। पेवेलियन में उन्होंने लकड़ी पर भगवान गणेश की प्रतिमा को बखूबी उकेर कर दिखाया जिससे पेवेलियन में मौजूद दर्शकों ने हिमाचल के इस अनछुए पहलू के बारे में जाना। 

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international trade fair - फोटो : G. pal

छोटे औजारों की चोट से बनते हैं देवी-देवताओं के मुखौटे 
हिमाचल प्रदेश पेवेलियन में पीतल की एक सपाट चादर के टुकड़ें पर हैरन (लोके का आयताकार छोटे बॉक्स जैसा टुकड़ा), चोंचनुमा हथौड़ी और बारीक छेनी की मदद से देवी-देवताओं के मुखौटे तैयार करने के हुरन को बखूब प्रदर्शित किया गया है। यहां इस कला को प्रदर्शित करते हिमाचल के कुल्लू निवासी ज्ञानचंद सोनी ने बताया कि वह करीब 25 सालों से इस कला को हिमाचल की संस्कृति में पिरोने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हैरन पर पीतल की चादर को रखकर उसपर हथौड़ी और छेनी के मदद से मखौटे की आकृति को आकार दिया जाता है। उन्होंने बताया कि धार्मिक रथ यात्राओं में रथों के आगे लगने वाले मुखौटे इसी कला के जरिये तैयार किए जाते है। 

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