मनुष्य का शरीर प्रदूषण से नहीं लड़ सकता, बचाव ही एकमात्र रास्ता है। यदि कोई लंबे समय तक प्रदूषण वाली जगह पर रहेगा तो उसमें कई तरह के विकार उत्पन्न हो सकते हैं। खासकर बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिला, पहले से बीमार, अस्थमा के मरीज सहित अन्य में गंभीर रोग हो सकते हैं।
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कर्तव्य पथ
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विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रकृति ने मनुष्य के शरीर को जीवाणुओं से लड़ने के लिए तैयार किया है, लेकिन प्रदूषक तत्व से लड़ने का कोई मैकेनिज्म विकसित नहीं किया। मौजूदा समय में दिल्ली-एनसीआर के अधिकतर क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर 500 तक पहुंच गया है। इसमें पीएम 2.5 का स्तर भी खतरनाक बना हुआ है। इसमें अधिकतर हिस्सा पीएम 1 का है, जो फेफड़ों के रास्ते सीधे खून में मिल जाता है और शरीर के दूसरे अंगों में जाकर उन्हें प्रभावित कर देता है।
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स्मॉग की चादर
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एम्स के एनाटॉमी विभाग के प्रमुख व प्रोफेसर डॉ. ए शरीफ ने बताया कि शोध के लिए हुए पोस्टमार्टम से पता चला कि प्रदूषण वाले क्षेत्र में रहने वाले लोगों के फेफड़े काले पाए गए, जबकि स्वस्थ लोगों के फेफड़े गुलाबी होने चाहिए। दिल्ली-एनसीआर की स्थिति अभी काफी खराब है। ऐसे में रोगियों व कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों को घर में ही रहना चाहिए।
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दिन भर रही स्मॉग की चादर
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मौजूदा स्तर में हमारे फेफड़े सीधे प्रभावित हो रहे हैं। इस दौरान सामान्य मनुष्य की हालत भी खराब हो सकती है। वातावरण में मौजूद पीएम 1 फेफड़े की गहराई तक पहुंचकर सीधे खून के रास्ते शरीर के दूसरे अंगों को बीमार बना रहे हैं। इसके कारण दिल, दिमाग, किडनी सहित दूसरे अंग बुरी तरह प्रभावित होते हैं। इन प्रदूषक तत्वों में हैवी मेटल, लैड सहित अन्य विषैले पदार्थ होते हैं जो स्थिति को और गंभीर बना देते हैं। इसके कारण उच्च रक्तचाप, मानसिक समस्या सहित अन्य गंभीर हो सकती है।
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स्मॉग की चादर
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प्रदूषण से बढ़ाया न्यूरो डिसऑर्डर
डॉ. शरीफ ने कहा कि सर्दियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से ब्रेन स्ट्रोक, मृगी सहित दूसरे रोग के मामले बढ़ जाते हैं। इसके अलावा कई अन्य तरह की समस्याएं शरीर में होने लगती हैं, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से कोई रोग हो।