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गाजियाबाद हादसे से दहल गए डॉक्टर, बोले- करियर में दूसरी बार देखा इतना खौफनाक मंजर
Mon, 04 Jan 2021 09:34 AM IST
प्राची प्रियम
योगेंद्र सागर, गाजियाबाद
योगेंद्र सागर, गाजियाबाद
Published by: प्राची प्रियम
Updated Mon, 04 Jan 2021 09:34 AM IST
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मुरादनगर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
मौत जब हमें लंबा जीने की छूट देती है तो एक-एक को बंधक बना लेती है, जिसे हम प्यार करते हैं...। यह लाइनें जयराम के अंतिम संस्कार के दौरान हुए हादसे में मरने वालों पर दुखी एक डॉक्टर ने कही। मुरादनगर हादसे में मरने वालों के शव जब जिला एमएमजी अस्पताल में पहुंचे तो हर कोई अपने अपने अंदाज में दर्द बयां कर रहा था। इस भयंकर मंजर को देखकर इलाज करने वाले डॉक्टर भी दुखी थे।
मलबे के नीचे दबे लोग
- फोटो : अमर उजाला
सैकड़ों मरीजों का आपरेशन व शवों का पोस्टमार्टम करने वाला डॉक्टर्स का दिल भी इस हादसे से कांप गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद मुरादनगर पहुंचे सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता भी दर्दनाक हादसा देख दहल गए।
muradnagar hadsa
- फोटो : अमर उजाला
घटनास्थल से वापस आने के बाद सीएमओ ने हादसे में मरने वाले परिजनों की स्थिति बयां की। हादसे से दुखी सीएमओ आईडीएसपी में जाकर बैठ गए। उन्होंने बताया कि उन्हें करियर में दूसरी बार इतना खतरनाक मंजर देखने को मिला है। मेरठ के विक्टोरिया पार्क में हुई आगजनी की घटना को याद करते हुए उन्होंने बताया कि 10 अप्रैल 2006 को विक्टोरिया पार्क में लगाए गए कंज्यूमर मेले में हुई आगजनी में 64 लोगों की मौत हुई थी।
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muradnagar hadsa
- फोटो : अमर उजाला
सैकड़ों लोग झुलसे थे। उस समय मृतकों का पोस्टमार्टम किया था। उस समय सूचना मिलने के बाद 20 मिनट में विक्टोरिया पार्क पहुंचा तो वहां हर तरफ चीख पुकार मची हुई थी। बुरी तरह झुलसे शव, घायलों को बाहर निकाला जा रहा था और लोग अपने परिजनों को तलाश रहे थे। ठीक 15 साल बाद इसी तरह का मंजर मुरादनगर में देखने को मिला। हर कोई अपनों को ढूंढ़ने में लगा था।
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muradnagar hadsa
- फोटो : अमर उजाला
लिंटर के नीचे से शवों को तलाशने का काम किया जा रहा था। चिकित्सक के रूप में मेरी जिम्मेदारी लोगों की जान बचाने की थी और यही मन में भी चल रहा था कि घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जाए ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। उन्होंने बताया कि मुरादनगर हादसे से एक बार फिर मेरठ के विक्टोरिया पार्क की तस्वीर आंखों के सामने घूम गई।