बेटा न होने से नाराज पति द्वारा पत्नी की जिंदा जलाकर हत्या के मामले में बुधवार को कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया। इसके बाद हत्या के मामले में दोषी को उम्रकैद की सजा और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट के इस फैसले पर पीड़ित परिजनों ने संतोष जाहिर किया है।
आज भी याद हैं मां की चीखें: बेटियों ने कराई बाप को उम्रकैद, बेटा न होने पर दरिंदे ने जिंदा जलाई थी पत्नी
अधिवक्ता ने बताया कि 13 जून को राजीव ने फोन कर हमें घर बुलाया। जब मौके पर पहुंचे तो मनोज ने अन्नू को अपने साथ ले जाने के लिए कहा। जब इससे इनकार किया तो आरोपी ने अन्नू की हत्या की बात कही थी। इसके बाद 14 जून की सुबह नाती लतिका बंसल ने सूचना दी कि उसकी मां को पिता और अन्य लोगों ने जिंदा जला दिया है। मौके पर पहुंचकर देखा तो पाया कि अन्नू बुरी तरह से जली हुई आंगन में पड़ी थी। बाद में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे हायर सेंटर के लिए रेफर किया था। उपचार के दौरान 20 जून को उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने हत्या की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी।
आरोपी की गिरफ्तारी न होने से परेशान परिजनों ने अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। करीब दो माह बाद भी पुलिस के ढुलमुल रवैये के कारण मृतका अन्नू की बेटी लतिका और तान्या बंसल ने अपने परिजनों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को खून से लिखा खत भेजा था। पूरा मामला मीडिया की सुर्खियां बना तो मुख्यमंत्री ने पीड़ित बेटियों को मिलने के लिए लखनऊ बुलाया था। इसके बाद पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये की आर्थिक मदद और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था। अब छह साल बाद अपर सत्र न्यायालय षष्टम विवेक कुमार की कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
अन्नू की मौत के बाद पुलिस ने हत्या की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद मामले की जांच करते हुए पुलिस ने मनोज के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले की चार्जशीट लगाकर कोर्ट में पेश की थी। जबकि इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना में पुलिस ने सात लोगों का नाम निकाल दिया था। शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विवेचक कमलेश शुक्ला को निलंबित कर दिया था। इसके बाद कोर्ट ने सबूतों के आधार पर मामले को फिर से हत्या की धाराओं में चलाने के निर्देश दिए थे। इसमें मृतका की दोनों बेटी लतिका और तान्या को चश्मदीद गवाह बनाया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने मामले में सबूत और गवाह पेश किए थे।
मृतका अन्नू बंसल की बड़ी बेटी लतिका बंसल ने बुधवार को कहा कि अधिवक्ता संजय शर्मा की सराहना की और कहा कि उन्होंने समय-समय पर हमें अपनी बेटियों की तरह संभाला और हमारी जीत को पक्का कराया। उन्होंने बताया कि वारदात के दिन दोनों बहनों को एक कमरे में बंद कर दिया था। इसके बाद हमारे पिता ने हमारी मां को आग लगाई थी। जब वह जल रहीं थी तो वह कमरे की खिड़की में से उन्हें जलता हुआ देख रहीं थीं।