इच्छामृत्यु की मंजूरी: असहनीय पीड़ा से बदली मां की प्रार्थना, बेटे के लिए की मुक्ति की कामना; संघर्ष की कहानी
आशुतोष यादव, अमर उजाला, गाजियाबाद
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 12 Mar 2026 08:52 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम आदेश पारित करते हुए 13 वर्षों से स्थायी वेजिटेटिव(अचेत) अवस्था में रह रहे 32 वर्षीय युवक के जीवनरक्षक उपचार को हटाने की अनुमति दे दी। यह पहली बार है जब अदालत ने 2018 के ऐतिहासिक फैसले के तहत पैसिव यूथेनेशिया(इक्षामृत्यु) की प्रक्रिया को किसी मामले में लागू करने की अनुमति दी है। उस फैसले में अदालत ने गरिमा के साथ मरने के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी थी।
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