Fire Accident Ghaziabad: गाजियाबाद के लोनी कोतवाली इलाके के कंचन पार्क कॉलोनी में रविवार सुबह करीब छह बजे चार मंजिला मकान के तीसरे और चौथे तल पर शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई। हादसे में जीशान (8), अयान (5), शान (11) और गुलबहार (30) की मौत हो गई। वहीं, चार लागों ने पड़ोसी की छत से कूदकर अपनी जान बचाई। दमकलकर्मियों ने एक घंटे में आग पर काबू पाया और चारों शवों को बाहर निकाला।
मूलरूप से मवाना, मेरठ निवासी शाहनवाज और शमशाद लोनी के कंचन पार्क कॉलोनी में करीब 30 साल से रह रहे हैं। दोनों भाई सिलाई का काम करते हैं। शाहनवाज के परिवार में पत्नी गुलबहार दो बच्चे जीशान और अयान थे। शमशाद के परिवार में उनकी पत्नी आयशा और दो बच्चे शान और जान हैं। यह सभी लोग चार मंजिला मकान में रहते हैं। शनिवार रात सभी लोग मकान की चौथी मंजिल में दो अलग-अलग कमरों में सो रहे थे। सुबह अचानक तीसरी मंजिल में आग लग गई। आग लगने पर पूरे मकान में धुआं फैल गया। धुआं फैलने पर शाहनवाज, शमशाद, आयशा और जान ने पड़ोसी की छत पर कूदकर जान बचाई। जबकि घर के अंदर फंसे तीन बच्चे और महिला की मौत हो गई।
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जांच के लिए पहुंची टीम
- फोटो : अमर उजाला
मकान में लगी आग, जिंदा जल गए तीन बच्चे और एक महिला
गाजियाबाद के लोनी के कंचन पार्क कॉलोनी अग्निकांड में शाहनवाज की पत्नी गुलबहार, दोनों बेटों जीशान और अयान व भतीजे शान की मौत हो जाने की बड़ी वजह पूरे घर में धुआं भर जाना रही। पत्नी और बच्चों को बचाने की कोशिश में झुलसे शाहनवाज और उनके भाई शमशाद का कहना है कि धुआं भर जाने की वजह से ही चारों का दम घुट गया और बेहोश हो गए। वे घर के दरवाजे तक भी पहुंच नहीं पाए। बेहोशी की हालत में ही चारों को आग की लपटों ने आगोश में ले लिया। चारों जिंदा जल गए।
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मौके पर जमा लोग और पुलिस
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चार मंजिला मकान में दोनों भाइयों के परिवार चौथे मंजिल पर रहते हैं। पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर कपड़ा रखा था। दोनों सिलाई का काम करते हैं। दोनों भाइयों के परिवार के सभी आठ सदस्य सो रहे थे कि सुबह छह बजे आग लग गई और धुआं फैलने लगा। शाहनवाज ने बताया कि उनकी आंख खुलने से पहले हो पूरे घर में धुआं फैल चुका था।
वह और शमशाद बाहर की ओर भागे। नीचे जाने के रास्ते को आग की लपटों ने घेर लिया था। इसलिए, पड़ोसी की छत पर कूद गए। वहां जाकर देखा कि चार लोग अंदर रह गए हैं। कुछ देर उनकी चीख सुनाई दी। धुएं की वजह से उन्हें बाहर आने का रास्ता नहीं मिला होगा। थोड़ी देर में ही चीख खामोशी में बदल गई।
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विपाल करते परिजन, झुलसा बच्चा
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मुख्य अग्निश्मन अधिकारी राहुल पाल ने बताया कि दमकल की टीम ने मकान की दीवार को तीन जगह से तोड़ा। इसके बाद अंदर प्रवेश किया। आग बुझने के बाद टीम कमरे में घुसी। यहां गुलबहार का शव बिस्तर पर पड़ा था। तीनों बच्चों के शव फर्श पर थे। चारों शव बुरी तरह झुलसे हुए थे। टीम ने चारों को बाहर निकाला। आसपास के लोगों ने भी आग बुझाने की कोशिश की। दमकल के आने तक लोग बाल्टियों से आग पर पानी डालते रहे। लेकिन, आग दमकल के आने के बाद ही बुझी।
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विलाप करते परिजन
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एक बेटे को आयशा ने निकाला, दूसरे को न बचा पाईं
शमशाद की पत्नी आयशा भी आग की लपटों से झुलसी हैं। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि धुआं फैलने के दौरान ही आयशा की आंख खुल गई थी। उनके पास में ही बेटा जान सो रहा था। उन्होंने उसे गोदी में उठाया और लेकर बाहर की ओर भागीं। बाहर जाकर उन्होंने देखा कि दूसरा बेटा अयान वहां नहीं हैं। वह बुरी तरह से घबरा गई। शान को बचाने के दौरान वह बुरी तरह से झुलस गई थीं। धुएं से उनकी हालत बिगड़ गई थी।