फरीदाबाद में अरावली की पहाड़ियों से होकर दिल्ली जाने का 12 किलोमीटर का रास्ता है। धौज स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से सामने आए सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल में शामिल डॉक्टर इसी रास्ते से होकर यूनिवर्सिटी परिसर से दिल्ली की सीमा में प्रवेश करते थे।
दिल्ली आने-जाने के दौरान संदिग्ध आतंकियों ने कई बार इसी रास्ते का प्रयोग किया। इस दौरान आरोपियों ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जाकर कई बार रेकी भी की। जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो कई संदिग्ध आतंकियों ने इस रूट का प्रयोग दिल्ली आने-जाने के लिए किया।
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दिल्ली में धमाके के बाद जले वाहन
- फोटो : ANI
ऐसे अरावली से होकर दिल्ली जाते थे संदिग्ध आतंकी
यूनिवर्सिटी से निकलकर संदिग्ध आतंकी डॉक्टर व उनके अन्य साथी मेन रोड तक आते। यहां से धौज थाने के बगल से सिलाखड़ी गांव की ओर सड़क से होकर सिलाखड़ी गांव पार करते ही अरावली पहाड़ी शुरू हो जाती है। अरावली पहाड़ी के चढ़ाई-ढलान वाले रास्तों से होकर आगे मांगर गांव पहुंचते हैं।
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दिल्ली में धमाके के बाद जले वाहन
- फोटो : ANI
रात के समय ये रास्ता काफी सुनसान हो जाता है और यहां स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। सिलाखड़ी से मांगर गांव के बीच लगभग 6-7 किलोमीटर के हिस्से में दोनों तरह अरावली की पहाड़ी और घना जंगल है। मांगर गांव पार करने के बाद ये रास्ता आगे जाकर गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर मांगर चौकी के पास निकलता है। यहां से लगभग 1 किलोमीटर चलकर दिल्ली की सीमा में प्रवेश वाहन कर जाते हैं।
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दिल्ली में धमाके के बाद जले वाहन
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इसी रूट से आई थी हिंदू एकता यात्रा
दिल्ली की सीमा से फरीदाबाद में 8 नवंबर को इसी बॉर्डर से बागेश्वर धाम वाले बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अगुवाई में निकाली गई सनातन हिंदू एकता यात्रा भी इसी रूट से आई थी। यहां से ये यात्रा गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर हनुमान मंदिर, सैनिक कॉलोनी होते हुए एनआईटी ग्राउंड पहुंची।
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अल फलाह यूनिवर्सिटी
- फोटो : अमर उजाला
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो ऐसा भी शक है कि ये यात्रा इस टेरर मॉड्यूल का टारगेट थी लेकिन यात्रा के यहां 8 नवंबर को आने से पहले 30 अक्तूबर को ही डॉ. मुज्जमिल को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके चलते वे अपने मनसूबों में कामयाब नहीं हो सके।