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निकिता हत्याकांड: एक साल बाद जेल से बाहर आ सकते हैं तौसीफ व रेहान, इस नियम से मिल जाएगी राहत!
Sat, 27 Mar 2021 09:18 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 27 Mar 2021 09:18 AM IST
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nikita tomar case
- फोटो : अमर उजाला
फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में बीकॉम अंतिम वर्ष की छात्रा निकिता तोमर हत्याकांड में शुक्रवार को कोर्ट ने दोषी तौसीफ और रेहान को उम्रकैद व 28 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस बहुचर्चित मामले के फैंसले को लेकर पूरे देश की निगाहें अदालत पर टिकी हुईं थीं।
कोर्ट में आरोपियों को ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
आपको बता दें कि निकिता तोमर हत्याकांड के मुख्य आरोपी तौसीफ व उसका साथी रेहान एक साल बाद जेल से बाहर आ सकते हैं। नियमों के मुताबिक कानून में इसका प्रावधान है। फैसला सुनाए जाने के एक साल के बाद सजा याफ्ता बंदी कोर्ट में पेरोल के लिए अपील लगा सकता है। मंजूरी मिलने पर वह अलग-अलग कारणों का हवाला देकर कुछ दिनों के लिए बाहर आ सकता है।
आरोपियों को कोर्ट ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को निकिता के हत्यारों को न्यायाधीश सरताज बसवाना की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुना दी। इसके बाद से लोग इस फैसले को लेकर अलग-अलग तरह से कानूनी सलाह लेते नजर आए। वरिष्ठ अधिवक्ता निर्दोष गुज्जर ने बताया कि नियमों के मुताबिक, रेहान व तौसीफ फैसले के एक साल बाद कोर्ट में पेरोल की अर्जी लगा सकते हैं।
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nikita murder case
- फोटो : अमर उजाला
इसके लिए जिला उपायुक्त से मंजूरी लेनी होती है। उपायुक्त मजबूत गारंटी के बाद ही मंजूरी देता है। इसमें मकान की मरम्मत के लिए चार हफ्ते, खेती बाड़ी के लिए छह हफ्ते, घर में किसी की मृत्यु हो जाए तो दो हफ्ते व शादी के लिए 28 दिन की पेरोल का प्रावधान है। इसके अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं।
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कोर्ट में भीड़
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट से राहत मिलने की बात पर उन्होंने बताया कि फैसले के 90 दिनों के भीतर आरोपियों को हाईकोर्ट में अपील करनी होगी। अपील मंजूरी के बाद दोषी अपने तथ्यों को अदालत में पेश करेगा। हाईकोर्ट यदि दोषी की अपील को स्वीकार नहीं भी करता तब भी उसे पेरोल मिल सकती है।