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क्या आप जानते हैं पहली बार चोरी नहीं हुई थी नोबेल पुरस्कार की रेप्लिका, पढ़ें यहां

Tue, 28 Feb 2017 01:44 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 28 Feb 2017 01:44 AM IST
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Did you know the first replica of the Nobel Prize was not stolen
nobel replica - फोटो : अमर उजाला
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया का श्रेष्ठ पुरस्कार नोबेल जिसकी हाल ही में एक रेप्लिका नई दिल्ली से चोरी हो गई थी। लेकिन यह रेप्लिका चोरी की कोई पहली घटना नहीं थी। सबसे मजेदार है कि कुछ चोर इसे महज छूकर अहसास करने के लिए ले गए थे और कुछ बतौर चोरी रुपये के लिए। 
Did you know the first replica of the Nobel Prize was not stolen
kailash satyarthi - फोटो : अमर उजाला
7 फरवरी 2017 को नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के नई दिल्ली स्थित कालका जी में आरावली अपार्टमेंट से रेप्लिका चोरी हो गई थी। साथ ही चोर उनके घर से गहने भी ले गए थे। फिंगर प्रिंट और नमूनों के आधार पर दो सगे भाइयों को पकड़कर रेप्लिका बरामद की गई। बाद में पता चला था कि दोनों को चोरी करने के बाद पता चला था कि उन्होंने क्या चुराया है ये। 
Did you know the first replica of the Nobel Prize was not stolen
o lawrence - फोटो : अमर उजाला
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से मार्च 2007 में भी एक रेप्लिका को यहीं के 22 वर्षीय छात्र ने इसलिए चोरी कर लिया था क्योकि वह उसे देखना था कि आखिर दुनिया के इतने बड़े पुरस्कार में क्या शक्ति है जो लोग इसके पीछे पागल हैं। इस पुरस्कार को वह केवल छूना चाहता था इसलिए उसने चोरी की। दरअसल, नोबेल पुरस्कार की यह रेप्लिका अमरीकी वैज्ञानिक ओ लॉरेंस को फिजिक्स के क्षेत्र मं दिया गया था। 
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desman dudu - फोटो : अमर उजाला
1984 में शांति के लिए साउथ अफ्रीका के समाजसेवी और धार्मिक नेता डेसमंड टूटू को दिया गया था। जून 2007 में घर से रेप्लिका चोरी हो गई। पुलिस ने रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की लेकिन नोबेल फाउंडेशन के दवाब के बाद कार्रवाई शुरू हुई और 24 घंटे के अंदर रेप्लिका को बरामद कर लिया गया। बता दें कि यह नोबेल पुरस्कार श्वेत और अश्वेत लोगों के बीच भेदभाव मिटाने के लिए दिया गया था। 
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ravindra nath - फोटो : अमर उजाला
25 मार्च 2004 में पश्चिम बंगाल की विश्वभारती यूनिवर्सिटी से एक रेप्लिका चोरी हो गई जिसे 1913 में रवींद्रनाथ टैगोर को साहित्य के लिए दिया गया था। यह रेप्लिका विश्वविद्यालय के म्यूजियम से चोरी हुई। पुलिस काफी साल तक इस केस में लगी रही मगर कोई सुराग हाथ नहीं आया। हालांकि, वेस्ट बंगाल की स्पेशल पुलिस टीम ने जांच आगे बढ़ाते हुए पिछले साल एक व्यक्ति को ‌अरेस्ट किया है। 
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