नोटबंदी ने तोड़ी भारतीय प्रिंट मीडिया की कमर, हजारों पत्रकारों ने गंवाई नौकरियां
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-गौरतलब है कि हिंदुस्तान टाइम्स जैसे बड़े मीडिया घराने की ओर से अचानक सात ब्यूरो और संस्करणों को बंद करने के एलान कर दिया है जिससे प्रिंट मीडिया दहशत में है।
-वहीं दूसरी ओर, आनंदबाजार पत्रिका समूह(एबीपी ग्रुप) ने भी बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू कर दी है जिसका असर उसके अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ पर साफ नजर आने लगा है।
-कुछ समय पहले ही टाइम्स ग्रुप के मालिक विनीत जैन ने अपने ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट कर बताया था कि में विज्ञापनों से आय घट रही है। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स के संस्करण बंद करने के फैसले का भी समर्थन किया है।
-जिन संस्करणों को बंद करने का फैसला किया गया उनमें भोपाल, इंदौर, रांची, कानपुर, वाराणसी और इलाहाबाद के अलावा कोलकाता संस्करण शामिल हैं. उत्तर प्रदेश में अहम विधानसभा चुनावों से पहले वहां तीन-तीन ब्यूरो और संस्करण बंद करने का फैसला काफी अहम है। नौ जनवरी को इन संस्करणों के आखिरी अंक बाजार में आए थे।