राजधानी में गर्मी प्रतिदिन नए-नए रिकॉर्ड कायम कर रही है। बीते कुछ दिनों से पड़ रही प्रचंड गर्मी से हर कोई परेशान है। मानसून भी दिल्ली एनसीआर से जैसे रूठ गया है। जून में जहां मौसम विभाग का अनुमान था कि दिल्ली-एनसीआर में 15 जून तक मानसून आ जाएगा, वहीं 15 जून आने तक यह अनुमान भौगोलिक परिस्थितियों के कारण गलत साबित हुआ। वहीं मौसम विभाग एक और अनुमान लगाया था कि जुलाई की शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर में अच्छी बारिश हो सकती है लेकिन जुलाई के पहले ही दिन जिस तरह की गर्मी पड़ी उसने 89 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। दिल्ली-एनसीआर की गर्मी और मानसून में देरी के पीछे मैडेन जूलियन ऑसिलेशन(एमजेओ) है। आगे जानिए क्या है ये मैडेन ऑसिलेशन जो भारत ही नहीं पूरी दुनिया के मौसम पर असर डालता है...
Delhi Weather: जानिए क्यों दिल्ली-एनसीआर से रूठा है मानसून, कब तक होगी बारिश
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एमजेओ दुनियाभर में मौसमी परिस्थितियों को प्रभावित करता है। एमजेओ एक समुद्री-वायुमंडलीय घटना है जो दुनिया भर में मौसम की गतिविधियों को प्रभावित करती है। यह साप्ताहिक से लेकर मासिक समयावधि तक उष्णकटिबंधीय मौसम में बड़े उतार-चढ़ाव लाने के लिए जिम्मेदार मानी जाती है। एमजेओ को भूमध्य रेखा के पास पूर्व की ओर सक्रिय बादलों और वर्षा के प्रमुख घटक या निर्धारक के तौर पर परिभाषित किया जा सकता है। यह आमतौर पर हर 30 से 60 दिनों में स्वयं की पुनरावृत्ति करती है।
सिर्फ एमजेओ नहीं बंगाल की खाड़ी में बन रहा कम दबाव वाला क्षेत्र भी दिल्ली-एनसीआर के मौसम को प्रभावित कर रहा है। यही वजहें हैं कि हल्की बारिश या धूल भरी आंधी बेशक चल रही है लेकिन मानसून की जिस बारिश का इंतजार दिल्ली-एनसीआर वासियों को है वह अभी तक नहीं आई है।
89 सालों में 1 जुलाई को सबसे गर्म रही दिल्ली, न्यूनतम तापमान ने भी तोड़ा रिकॉर्ड
राजधानी में गर्मी प्रतिदिन नए-नए रिकॉर्ड कायम कर रही है। जुलाई का पहला दिन बीते 89 सालों में सबसे गर्म रहा। 1931 के बाद पहली बार अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं, न्यूनतम तापमान भी बीते एक दशक में सबसे ज्यादा 31.7 डिग्री सेल्सियस रहा। दूसरी तरफ दिल्ली लगातार तीसरे दिन लू के थपेड़े झेलती रही। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले एक हफ्ते तक गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। इस बीच अगले 24 घंटे में होने वाली हल्की बारिशजनित उमस लोगों को ज्यादा परेशान करेगी।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इससे पहले वर्ष 1931 में दिल्ली का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। इसके बाद 1987 व 2012 में अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस रहा। गुरुवार की गर्मी 1987 व 2012 का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 43.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गई। 89 सालों में यह पहला मौका है जब जुलाई में पारा इस स्तर तक जा पहुंचा है। गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान सामान्य से छह अधिक 43.6 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान सामान्य से चार अधिक 31.7 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले 24 घंटों में 50-60 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली-एनसीआर के कुछ इलाकों में हल्की बारिश की भी संभावना है। पूरे सप्ताह बादलों के साथ सूरज की लुकाछिपी चलेगी, लेकिन इसके बाद भी पारा 40 के पार रहेगा। इस वजह से लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।