दिल्ली के किराड़ी में सोमवार को हुए हादसे में आग की चपेट में आने से दो बच्चों समेत एक महिला की जान बाल-बाल बच गई। पूजा ने बताया कि जान बचाने में पड़ोसियों ने मदद की और उनकी वजह से ही बेटी और भतीजी समेत उसकी भी जान बच गई। पूजा के मुताबिक, वह अपने कमरे में सो रही थी। इसी दौरान कमरे में धुआं भरने जैसा महसूस होने पर वह बेटी आराध्या और भतीजी सौम्या को लेकर छत की ओर भागी। छत पर जाने के बाद वह शोर मचाने लगी। तब तक आग की लपटें देखकर आसपास के लोग उनके मकान के पास पहुंच चुके थे। आग की लपटों की वजह से छत पर लगी लोहे की रेलिंग गर्म हो चुकी थी।
किराड़ी अग्निकांड: धुआं देख बेटी और भतीजी को गोद में लेकर छत की ओर भागी पूजा, और फिर...
सौम्या ने नीचे देखने के लिए उस रेलिंग को पकड़ा तो उसके दोनों हाथ झुलस गए। मुंह नीचे करने से आग की लपटों से उसका चेहरा भी झुलस गया। शोर मचाने पर लोगों का ध्यान उनकी ओर गया और फिर उन्होंने सीढ़ी मंगवाकर पड़ोस की छत पर ले जाकर तीनों को बचाया। पूजा के मुताबिक, घटना के समय उनके पति हरिद्वार गए थे। उन्होंने फोन कर उन्हें घर में आग की जानकारी दी। हालांकि, आवाज ठीक सुनाई नहीं दे रही थी। मकान में आग लगने की बात सुनकर वह तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हो गए। पूजा ने बताया कि वह छत पर नहीं पहुंचतीं तो उनका बच पाना मुश्किल था।
‘मेरा दम घुट रहा है मुझे बचा लो’
पहली मंजिल पर फंसे उदयकांत ने मौत से पहले अपने भाई, बहन और अन्य लोगों को फोन कर बचाने की गुहार लगाई थी। उसके भाई संजीव ने बताया कि रात में उदयकांत का फोन आया। उसने फोन पर बताया कि उसका दम घुट रहा है, उसे बचा लो। पीछे से अन्य लोगों के कराहने की आवाजें आ रही थीं और शोर भी हो रहा था। संजीव ने पूछा कि क्या हुआ है, तो उसने बताया कि उसके मकान में आग लग गई है और दरवाजा नहीं खुल रहा है। संजीव भागकर उसके घर के पास पहुंचा। उसने देखा कि गोदाम से आग की लपटें ऊपर की मंजिल पर जा रही थीं। उन लोगों ने आग बुझाने की काफी कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए।
बहादुरी दिखाकर तीन लोगों को बचाया
स्थानीय निवासी रचना ने बताया कि आग लगने के शोर पर वह अपने घर से भागकर मौके पर आईं। उन्होंने देखा कि पूजा छत से बचाने की गुहार लगा रही है। उनके पड़ोसी देवेश पाठक, नरेंद्र व अन्य लोगों की मदद लेकर वे तुरंत सबमर्सेबल पंप में पाइप लगाकर आग बुझाने की कोशिश करने लगे। बिजली कटने की वजह से वह आग को बुझा नहीं पाए। पूजा व उनके बच्चों को बचाने के लिए उन्होंने सीढ़ी का इंतजाम किया। रचना ने बताया कि उन्हें मलाल है कि वह घर में मौजूद अन्य लोगों को नहीं बचा पाईं।
घायलों की हालत में सुधार
हादसे में घायल पूजा, उनकी बेटी आराध्या और भतीजी सौम्या की हालत में सुधार है। पूजा और उनकी बेटी को धुएं की वजह से सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। रेलिंग पकड़ने की वजह से सौम्या पंद्रह फीसदी झुलस गई थी। तीनों का किराड़ी के तोमर नर्सिंग होम में इलाज चल रहा है।