दिल्ली के मालवीय नगर के हौज रानी गांव में 21 लोगों की जान लेने वाली आग की घटना ने राजधानी में लाइसेंस और निगरानी व्यवस्था की बड़ी खामी उजागर कर दी है। होटल जिस इमारत में चल रहा था, उसके पास न तो होटल संचालन का लाइसेंस था और न ही एमसीडी रिकॉर्ड में वह होटल के रूप में दर्ज था।
दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग से बेड एंड ब्रेकफास्ट’ का लाइसेंस और एमसीडी से चाय बेचने की अनुमति लेकर 25 कमरों का होटल संचालित किया जा रहा था। अग्निकांड के बाद सामने आए तथ्य और प्रशासनिक जानकारी ने गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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दिल्ली के होटल में लगी आग
- फोटो : पीटीआई
एमसीडी के उच्च अधिकारियों के मुताबिक बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना मूल रूप से निजी मकानों में सीमित संख्या में पर्यटकों को ठहराने के लिए बनाई गई है, जिसमें अधिकतम छह कमरों तक मेहमान रखने की अनुमति होती है।
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दिल्ली के होटल में लगी आग
- फोटो : पीटीआई
आग जिस भवन में लगी, उसमें 25 कमरे बने थे और होटल की तरह संचालित हो रहा था। यानी लाइसेंस और वास्तविक उपयोग में बड़ा अंतर मौजूद था। एमसीडी अधिकारियों ने बताया कि रिकॉर्ड में इस प्रतिष्ठान के नाम पर होटल या गेस्ट हाउस संचालन का लाइसेंस दर्ज नहीं मिला है।
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दिल्ली के होटल में लगी आग
- फोटो : पीटीआई
होटल मालिक ने चाय बेचने की श्रेणी का लाइसेंस ले रखा था। हादसे की जांच के बीच भवन की कानूनी स्थिति भी चर्चा में है। एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार यह इमारत हौज रानी गांव की लालडोरा भूमि पर स्थित है और इसका निर्माण 20 वर्ष पहले किया गया था।
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दिल्ली के होटल में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
अधिकारियों का कहना है
दिल्ली के गांवों में भवन उप नियम वर्ष 2011 में लागू हुए थे। इससे पहले लालडोरा क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए एमसीडी से नक्शा पास कराने की बाध्यता नहीं थी। इसी वजह से इस भवन के निर्माण के लिए एमसीडी की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं पड़ी।