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दिल्ली: अब पराली से घर भी सजेगा और प्रदूषण भी होगा कम, स्कूलों और घरों में भी होगा इस्तेमाल

Mon, 12 Oct 2026 08:50 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Mon, 12 Oct 2026 08:50 AM IST
सार

स्टार्टअप को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सहित कई अन्य विभाग आर्थिक सहायता दे रहे हैं। डीटीयू के पूर्व छात्र राजेश सोइन ने भी चार करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी है।

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new initiative to reduce pollution caused by stubble burning
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार
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दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) के  एक पूर्व छात्र ने पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक नई पहल की है। इस नवाचार के तहत खेतों से निकलने वाली पराली का उपयोग फर्नीचर बनाने में किया जा रहा है। यह फर्नीचर विश्वविद्यालयों, स्कूलों और घरों की साज-सज्जा में इस्तेमाल हो रहा है, साथ ही किसानों की आय भी बढ़ रही है।

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डीटीयू से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले पूर्व छात्र सुमित पोपली ने बताया कि देश में हर साल करीब 200 दस लाख टन पराली जला दी जाती है। यह समस्या उत्तर और दक्षिण भारत दोनों जगह मौजूद है। पराली जलाने से कार्बन धुएं और ग्रीनहाउस गैसों के रूप में वातावरण में पहुंचता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है। इस समस्या को कम करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। सुमित ने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने पर काम हो रहा है, लेकिन निर्माण सामग्री में निहित कार्बन कम करने की रफ्तार धीमी है। स्टार्टअप को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सहित कई अन्य विभाग आर्थिक सहायता दे रहे हैं। डीटीयू के पूर्व छात्र राजेश सोइन ने भी चार करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी है।
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पराली से फर्नीचर निर्माण प्रक्रिया
एक एकड़ खेत से करीब ढाई से तीन टन पराली निकलती है। किसानों से धान की पराली दो रुपये प्रति किलोग्राम और गेहूं की पराली तीन से आठ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदी जाती है। हरियाणा के फतेहाबाद जिले में एक इकाई स्थापित की गई है, जहां पराली को पीसकर पाउडर बनाया जाता है। 
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इस पाउडर से उच्च तापमान और दबाव पर बाइंडर तकनीक के जरिये बायो-बोर्ड तैयार किए जाते हैं। इन बोर्डों से फर्नीचर और सजावट की विभिन्न वस्तुएं बनाई जाती हैं। सुमित ने बताया कि करीब 30 किलोग्राम पराली से एक बोर्ड तैयार होता है। पराली से बना एक छोटा बोर्ड डीटीयू परिसर में सजावट के लिए लगाया गया है। विश्वविद्यालय परिसर के एक कमरे में पराली से तैयार फर्नीचर लगाने की योजना पर भी काम चल रहा है। 


इसके अलावा, स्कूली विद्यार्थियों के लिए पराली से बेंच तैयार की जा रही हैं। पराली से शतरंज की बिसात और कमरे की साज-सज्जा से जुड़ा फर्नीचर भी बन रहा है। इस नवाचार को बढ़ावा देने के लिए डीटीयू के रसायन विज्ञान विभाग सहित कई अन्य विभागों के प्रोफेसर सहयोग कर रहे हैं।

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