दिल्ली में बृहस्पतिवार को बजट पेश हुआ। जानें केजरीवाल सरकार की इन योजनाओं पर विपक्ष का क्या कहना है..
दिल्ली बजट: केजरीवाल सरकार की योजनाओं से निराश दिखा विपक्ष, पढ़ें कांग्रेस-भाजपा के तीखे तंज
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दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि दिल्ली सरकार का बजट आंकड़ों की बाजीगरी का खेल हैं। सरकार ने संवैधानिक स्वीकृति लिए बिना योजनाओं की घोषणाएं की हैं। इसके चलते जनता के हिस्से में केवल निराशा ही हाथ आएगी। बजट प्रदूषण कम करने से लेकर राशन वितरण तक निजी कम्पनियों से सांठगांठ वाला है। ऐसा लगता है कि केजरीवाल सरकार अब निजी कम्पनियों से किक बैक का खेल खेलने की तैयारी कर रही है। इस तरह यह ग्रीन बजट के बजाए रेड बजट है।
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली सरकार ने वर्ष 2017-18 में आवंटित बजट को घटा दिया और उसमें घोषित अनेक बढ़ी योजनाओं को दरकिनार कर किया है। इन योजनाओं को आउट कम बजट में शामिल करने की स्थिति में सरकार के बजट की कलई खुल जाती। इसी तरह दिल्ली सरकार शिक्षा, स्थास्थ्य आदि के क्षेत्र की योजनाएं पूरी नहीं कर सकी, जबकि वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में बड़े-बड़े दावे किए है। उन्होंने बजट भाषण में केंद्र सरकार और उपराज्यपाल की निंदा करने के लिए बजट का राजनीति रंग देने का आरोप लगाया।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि दिल्ली सरकार का बजट खोखला कागजी है, जिसमें आंकड़ों की जादूगरी की गई है। यह बजट जनता की आशाओं के अनुरूप नहीं है। पिछले ती बजटों में किए गए वायदे पूरे नहीं हुए, बल्कि विभिन्न विभागों के बजट का फंड लैप्स हुआ है। इस कारण विभिन्न विभागों में बढ़ाए गए बजट का कोई औचित्य नहीं है। तीन वर्षों में आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार प्रदूषण को रोकने में पूरी तरह से असफल रही है और प्रदूषण का स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार में वित्त एवं स्वास्थ्य मंत्री रहे डा. एके वालिया ने कहा कि स्वास्थ्य को लेकर बजट में मात्र घोषणाएं है। तीन साल में एक हजार के बजाए मात्र 160 मौहल्ला क्लीनिक खोले जा सके है। एक भी नया अस्पताल नही बनाया गया है। उन्होंने अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाने पर भी सवाल उठाया।