सीवर लाइन में बनने वाली सीवर गैसों में हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया, मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि गैसें बनती हैं। ये गैस स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होती हैं। एक बार यह गैसें सांस के साथ फेफड़ों में जाती है तो इसके तुरंत ही बेहोशी छा जाती है। कई बार इन गैसों की वजह से विस्फोट भी हो जाता है। सीवर में उन्हीं कर्मियों को उतरना चाहिए जिन्होंने प्रशिक्षण लिया हो।
इन मौतों का जिम्मेदार कौन: दो दिन में छह लोगों के लिए काल बना सीवर, ये रहे 2019 से 2022 तक दर्दनाक हादसों के आकंड़े
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संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में हुई मौतों के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है। जिन अधिकारियों ने एमटीएनएल का की केबल के रखरखाव का ठेका सूरज को दिया हुआ था, क्या उन्होंने बचाव के लिए कोई उपकरण इनको दिए हुए थे या नहीं। क्या सूरज की जिम्मेदारी थी कि वह अपने कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाए।
पुलिस इन सबका पता लगाने का प्रयास कर रही है। इन चार मौतों के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है, उसका पता लगाया जा रहा है। पुलिस ने बुधवार देर शाम तक इस संबंध में अभी कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया था। हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी अज्ञात के खिलाफ ही लापरवाही का मामला दर्ज करने की तैयारी चल रही है।
सीवर में हुई मौत के कुछ आंकड़े
- 23 मार्च 2022: तुगलक रोड इलाके में एमटीएनएल का केबल चोरी करने सीवर में घुसे दो युवकों की मौत, युवकों के बेहोश होने के बाद उसका दोस्त सीवर का ढक्कन बंद कर फरार हो गया था।
- 26 मार्च 2021: पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज इंडस्ट्रियल थाना इलाके के पर्ल ग्रैंड बैंक्वेट हॉल में सीवर में सफाई के दौरान दो लोगों की की मौत हो गई।
- 3 फरवरी 2020: कड़कड़डूमा इलाके में सीवर की सफाई के लिए उतरे एक सफाई कर्मी की मौत।
- 24 नवंबर 2019: उत्तर पश्चिमी दिल्ली के शकूरपुर में सीवर की सफाई करने उतरे एक 35 वर्षीय व्यक्ति की मौत, तीन अन्य हुए बेहोश।