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सीवर में दम घुटने से चार की मौत: जिंदगियां बचाने गया जांबाज सतीश, अपनी भी जिंदगी हारा, पीछे छोड़ गया पत्नी और तीन छोटी बेटियां

Wed, 30 Mar 2022 08:28 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 30 Mar 2022 08:28 PM IST
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four people dead in sewer line recovered in rohini
एमटीएनएल केबल की मरम्मत के लिए गहरे सीवर में उतरे तीन कर्मचारियों समेत चार की मौत - फोटो : अमर उजाला

जिम में बॉडी-बिल्डिंग करने वाला सतीश बेहद जांबाज था। लॉकडाउन से पूर्व वह लाडो सराय में बाउंसर की नौकरी करता था। इसलिए हमेशा ही उसके हौंसले बुलंद रहते थे। लॉकडाउन में उसकी नौकरी गई तो आर्थिक स्थिति खराब हो गई। किराए पर ई-रिक्शा लेकर चलाने लगा। मंगलवार शाम को वह ई-रिक्शा लेकर संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचा। वहां उसने देखा कि तीन लोग अंदर सीवर में फंसे हैं। मौके पर तमाशबीनों की भीड़ मौजूद थी, लेकिन कोई अंदर फंसे लोगों को बचाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। फौरन सतीश ने अपना ई-रिक्शा वहीं खड़ा किया और वह भी सीवर में सभी को बचाने उतर गया, लेकिन वह खुद भी मौत के शिकंजे में फंस गया। लोगों को बचाने पहुंचा सतीश खुद भी अंदर फंस गया और उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद से उसके परिजनों का रोते-रोते बुरा हाल है। बाहरी-उत्तरी जिला पुलिस ने परिवार की आर्थिक मदद करने का भरोसा दिया है।

four people dead in sewer line recovered in rohini
मृतक सतीश - फोटो : अमर उजाला

सतीश के साले मोहन अरोड़ा ने बताया कि मूलरूप से डकोरा, पलवल का रहने वाला सतीश अपने परिवार के साथ गली नंबर-8, सरदार कालोनी, रोहिणी सेक्टर-16 में रहता था। इसके परिवार में पत्नी नेहा (35) के अलावा तीन बेटी तिशा (14) कृतिका (8) और अरबी (2) के अलावा तीन बड़े भाई हैं। सतीश के बड़े भाई कृष्ण ने बताया कि उनका भाई शुरुआत से ही बहुत बहादुर था। वह किसी भी हालात में हार नहीं मानता था। बचपन से ही उसे सेहत बनाने का शौक था। इसी वजह से वह जिम जाता था। 

अच्छी बॉडी और कदकाठी की वजह से उसे बाउंसर की नौकरी भी मिल गई थी। लेकिन लॉकडाउन हुआ तो उसकी नौकरी चली गई। सतीश ने अपने परिवार को चलाने के लिए ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया था। मंगलवार दोपहर खाना खाकर वह ई-रिक्शा लेकर निकला था। इसके बाद वह सवारियों की तलाश में संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचा और दूसरे लोगों की जान बचाने के चक्कर में अपनी भी जान गंवा बैठा।

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दम घुटने से चार लोगों की मौत - फोटो : अमर उजाला

सतीश अपनी तीनों बच्चियों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहता था। लेकिन अब परिवार को चिंता सता रही है कि आगे परिवार का क्या हुआ। मामले पर बाहरी-उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त बृजेंद्र कुमार यादव ने बताया कि पुलिस सतीश की जांबाजी को सलाम करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। पुलिस की ओर से सतीश के परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर भी सतीश की मदद के लिए मुहीम चलाई जा रही है। सोशल मीडिया पर उसकी पत्नी नेहा के अकाउंट की डिटेल शेयर की गई है, जिसमें लोगों से परिवार की मदद करने के लिए कहा जा रहा है। परिवार को मंगलवार रात को ही सतीश के सीवर में फंसने का पता चल गया था।

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मृतक पिंटू राउत - फोटो : अमर उजाला

सुबह मिली पिंटू की मौत की खबर, परिवार का रोते-रोते बुरा हाल...
मूलरूप से झारखंड का रहने वाला पिंटू राउत पिछले काफी समय से ठेकेदार सूरज कुमर सहानी के पास काम करता था। इसके परिवार में पत्नी सुलेखा, बेटा अंकित (12), बेटी काजल कुमारी (9) और बूढ़ी मां हैं। इसका परिवार झारखंड में रहता है। पिंटू तिलक नगर के गोपाल नगर में अपने गांव के कई अन्य लड़कों के साथ रहता था। पिंटू के भांजे सिलोंधर कुमार ने बताया कि वह बुराड़ी के नत्थूपुरा में रहता है। दिल्ली में रहकर वह पढ़ाई कर रहा था। बुधवार सुबह उठकर उसने अखबार पढ़ा तो उसे हादसे का पता चला। लेकिन उसे यह पता नहीं था कि हादसे में उसके ही मौसी की मौत हुई है। बाद में उसके पास कॉल आया और हादसे का पता चला। दूसरी ओर पिंटू साथ रहने वाले संजय कुमार ने बताया कि अक्सर काम के सिलसिले में पिंटू रात-रातभर नहीं होता था। रात को जब वह वापस नहीं आया तो उनको लगा कि काम आ गया होगा। लेकिन सुबह उन्होंने ठेकेदार के बेटे को कॉल किया तो हादसे का पता चला। संजय ने बताया कि परिवार को मौत की खबर मिली तो उनका रोते-रोते बुरा हाल है। कुछ लोगों ने पिंटू का शव झारखंड ले जाने में उनकी मदद की। इसके बाद दिल्ली में मौजूद परिजन शव एंबुलेंस झारखंड के लिए रवाना हो गए।

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मृतक बच्चू सिंह - फोटो : अमर उजाला

बेहद मेहनती थे चाचा बच्चू सिंह...
बच्चू सिंह भी एमटीएनएल के प्राइवेट ठेकेदार सूरज कुमार सहानी के पास पिछले काफी समय से काम कर रहे थे। बच्चू ने विवाह नहीं किया था। वह अपने छोटे भाई के परिवार के साथ उत्तम नगर के भगवती विहार में रहते थे। बच्चू के भतीजे धर्मवीर ने बताया कि उसके चाचा बेहद मेहनती थे। कभी-कभार काम ज्यादा होने पर वह रात को घर भी नहीं आते थे। मंगलवार को जब वह घर नहीं आए तो परिवार ने चिंता भी नहीं की। लेकिन सुबह को उनके पास कॉल आया और बच्चू की मौत का पता चला। इसके बाद परिवार बाबू जग जीवन राम अस्पताल पहुंचा। परिवार को यकीन ही नहीं हो पा रहा था कि बच्चू की मौत हो गई।

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