फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Death warrant issued to Nirbhaya culprits but these option can help curative mercy review petition

डेथ वारंट जारी होने से फांसी तय नहीं, निर्भया के दोषियों को अब भी बचा सकते हैं ये कानूनी विकल्प

Tue, 07 Jan 2020 08:19 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Tue, 07 Jan 2020 08:19 PM IST
विज्ञापन
Death warrant issued to Nirbhaya culprits but these option can help curative mercy review petition
निर्भया में दोषियों की फांसी का रास्ता साफ - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को निर्भया की मां द्वारा दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए चारों दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया है। डेथ वारंट में 22 जनवरी को फांसी की तारीख निर्धारित की गई है। डेथ वारंट के मुताबिक 15 दिन बाद चारों दरिंदों को फांसी हो जाएगी, लेकिन ऐसा पूरी तरह तय नहीं है। डेथ वारंट जारी होने के बाद भी उनके पास कुछ विकल्प बचे हैं, जिसकी मदद से फांसी टल सकती है। यहां पढ़ें अब उनके पास कौन-कौन से रास्ते बचे हुए हैं-

विज्ञापन

Death warrant issued to Nirbhaya culprits but these option can help curative mercy review petition
निर्भया के दोषी - फोटो : अमर उजाला

निर्भया के चारों दोषियों ने अब भी एक-एक 'लाइफलाइन' बचा रखी है। किसी की दया याचिका, किसी की क्युरेटिव पिटीशन और किसी की पुनर्विचार याचिका के विकल्प बचे हुए हैं। डेथ वारंट जारी होने के बाद भी वे इन कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिसके पास केवल क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने का विकल्प है, उनके लिए वह आखिरी रास्ता है, लेकिन जिनके पास पुनर्विचार और दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है, उनका मामला अब भी लंबा खिंच सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

Death warrant issued to Nirbhaya culprits but these option can help curative mercy review petition
निर्भया के चारों दोषी - फोटो : Social Media

अगर वे सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू या क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करते हैं, तो उनके खारिज होने के बाद भी राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर किए जाने का प्रावधान है। राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद-72 के तहत दया याचिका पर सुनवाई करते हैं। इस दौरान राष्ट्रपति गृह मंत्रालय से रिपोर्ट मांगते हैं। सरकार अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेजती है और फिर राष्ट्रपति दया याचिका का निपटारा करते हैं। अगर राष्ट्रपति दया याचिका खारिज कर देते हैं तो उसके बाद मुजरिम को फांसी पर लटकाने का रास्ता साफ होता है। ऐसे में निर्भया के दोषियों ने अगर राष्ट्रपति से गुहार लगाई, तो फांसी टल सकती है।

विज्ञापन

Death warrant issued to Nirbhaya culprits but these option can help curative mercy review petition
निर्भया के दोषी - फोटो : सोशल मीडिया

अगर 15 दिनों के अंदर सभी विकल्पों पर फैसला साफ हो जाता है तो 22 तारीख को फांसी तय है, लेकिन अगर किसी तरह का पेंच फंसा तो फांसी टल भी सकती है। मसलन, यदि दोषियों में से किसी ने राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी, जिसपर 22 जनवरी तक फैसला नहीं आया, तो उसकी फांसी इसी आधार पर टल सकती है। कानून के मुताबिक फांसी से पहले दोषी को उसके मौलिक और कानूनी अधिकार मिलने चाहिए। ऐसे में इन अधिकारों का फायदा उठाकर निर्भया के दोषी बचने की कोशिश कर सकते हैं। यहां तक की कानून दोषियों को डेथ वारंट को चुनौती देने का अधिकार भी देता है। 

Death warrant issued to Nirbhaya culprits but these option can help curative mercy review petition
निर्भया के दोषी - फोटो : सोशल मीडिया

मालूम हो कि पिछले दिनों कानूनी विकल्पों के इस्तेमाल के बारे में पूछे जाने पर दोषियों ने तिहाड़ जेल प्रशासन को लिखित जवाब दिया था कि वे अपने अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहते हैं। ऐसे में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल कर वे फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की गुहार भी लगा सकते हैं। हालांकि क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो जाने के बाद वे किसी तरह की कानूनी सहायता नहीं ले पाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed