सीएए-एनआरसी के विरोध में वर्ष 2020 में हुए दंगे के दौरान हाजी तहसीन के बड़े बेटे आस मोहम्मद की मौत हो गई थी। 25 फरवरी की दोपहर को वह किसी काम से घर से बाहर निकले थे, लेकिन घर नहीं लौटे। परिजन उनकी तलाश में जुटे रहे, लेकिन काफी प्रयासों के बाद भी मोहम्मद नहीं मिले। इस दौरान 9 मार्च को गोकुलपुरी ड्रेन से बेहद सड़ी-गली हालत में मोहम्मद का शव मिल गया। उनकी हत्या की गई थी। इस सदमे से परिवार उबरने का प्रयास कर रहा था। अब परिवार के साथ इतना बड़ा हादसा हो गया।
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- फोटो : अमर उजाला
परिजनों ने बताया कि पहली मंजिल पर तहसीन पत्नी जीनत बेगम और नाजिम के परिवार के साथ रहते थे। दूसरी मंजिल पर आस मोहम्मद और चांद मोहम्मद का परिवार रहता था। आस मोहम्मद की मौत के बाद तहसीन ही परिवार का ख्याल रखते थे। आस मोहम्मद के परिवार में पत्नी साहेबा, बेटा रिहान, बेटी सोनम और साइमा है। 15 वर्षीय रिहान ने बताया कि मामा के यहां बिजनौर में शादी थी। 15 अप्रैल को वह मां और दोनों बहनों के साथ शादी में चला गया। उसकी नौ साल की बहन साइमा मूक-बधिर है। शुक्रवार देर रात को मां के मोबाइल पर हादसे की सूचना मिली। रिहान अपनी मां को लेकर दिल्ली आ गया। यहां आकर पता चला कि हादसे में दादा, चाचा, चाची और भाई-बहनों की मौत हो गई है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। बाकी घायलों की सलामती के लिए दुआएं की जा रही थीं। घर पर रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ था।
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पीएम मोदी ने भी हादसे पर जताया दुख, मदद का किया एलान
हादसे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। पीएम कार्यालय के एक्स अकाउंट पर जारी बयान में कहा गया है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में इमारत ढहने से हुई मौतों से दुखी हूं। जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया उनके प्रति संवेदना। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। साथ ही प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की मदद देने की घोषणा की है।
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15 साल पहले बनाई गई थी 'मौत' की इमारत
दयालपुर इलाके में शुक्रवार देर रात एक चार मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह भर-भराकर जमींदोज हो गई। अचानक तेज धमाका हुआ तो पड़ोसी नींद से जागे। बाहर निकलकर देखा तो गली में धुंए का गुबार था। इस बीच मौके से चीखने-पुकारने की आवाज आने लगीं। कुछ ही देर में लोगों को इमारत गिरने का अहसास हो गया।
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स्थानीय लोग मदद को भागे। बाद में कंट्रोल रूम को कॉल की गई। लोगों ने एक-एक कर घायलों को मलबे से निकालना शुरू कर दिया। इस बीच सूचना मिलने के बाद पुलिस व दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। हादसे के समय इमारत में 22-25 लोग मौजूद थे। घटना को देखते हुए डीडीएमए (दिल्ली आबदा प्रबंधन), एनडीआरएफ, एमसीडी व बाकी बचाव दलों को मौके पर बुला लिया गया।