नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 11 फरवरी 2011 को हुई टैटू गर्ल नीतू सोलंकी की हत्या की मिस्ट्री का आखिरकार अंत हो गया। जिंदा रहते हुए दिल्ली पुलिस आरोपी राजू गहलोत तक नहीं पहुंच पाई, लेकिन मौत के बाद पुलिस को उसका पता चला। जानिए 8 साल से फरार और नीतू सोलंकी की बेरहमी से हत्या करने वाले राजू को कैसे मिली मौत...
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नीतू सोलंकी के हत्यारोपी राजू की मौत
- फोटो : सोशल मीडिया
राजू गहलोत ने गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में लिवर की बीमारी के कारण दम तोड़ दिया। मशहूर टैटू गर्ल हत्याकांड के बाद करीब 8 साल तक राजू पुलिस की आंखों में धूल झोंककर गुरुग्राम में नाम बदलकर रहता रहा। इस बीच उसने अपने परिवार से भी कभी संपर्क भी नहीं किया।
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नीतू सोलंकी के हत्यारोपी राजू की मौत
- फोटो : सोशल मीडिया
मंगलवार को अंतिम सांस लेने से पहले उसने अपनी मां को कॉल कर जब बीमारी की खबर दी तो पुलिस टीम गुरुग्राम के पारस अस्पताल पहुंची, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। परिजनों ने बुधवार को उसका अंतिम संस्कार कर दिया। हत्याकांड के समय राजू 15 मोबाइल और 15 सिमकार्ड का इस्तेमाल करता था। उस पर 2 लाख का इनाम भी घोषित था।
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नीतू सोलंकी
- फोटो : सोशल मीडिया
प्रॉपर्टी के लिए मारी गई नीतू
मामले की छानबीन कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उत्तम नगर के गांव नवादा निवासी राजू व नीतू की मुलाकात एक कॉमन दोस्त के जरिए एक पार्टी में हुई थी। राजू एयर इंडिया और नीतू एक नामी कॉल सेंटर में नौकरी करती थी। दोनों का गांव भी एक ही था और बिरादरी भी, इसलिए उन्हें पता था कि परिजन व रिश्तेदार कभी उनके रिश्ते को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने साथ रहने का फैसला किया।
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नीतू सोलंकी
- फोटो : अमर उजाला
राजू ने एयर इंडिया को बगैर बताए नौकरी छोड़ दी, जबकि नीतू ने सिंगापुर जाने की बात कहकर परिजनों को गुमराह किया। जनवरी-फरवरी 2010 से दोनों साथ रहने लगे। पहले मुंबई और फिर गोवा व बंगलूरू में रहे। रुपये खत्म होने के बाद दोनों वापस दिल्ली आ गए। यहां हरिनगर आश्रम इलाके में दो माह के लिए एक मकान किराए पर लिया। उन्होंने किसी भी पड़ोसियों से संबंध नहीं रखा।