घरों में साफ-सफाई का काम करने वाली महिला 31 अक्तूबर 2006 को अपने घर से चलते समय पति को बताकर गई थी कि आज उसे सुरेंद्र कोली ने बुलाया है। इसलिए वह पंधेर की कोठी संख्या डी-5 पर काम की बात करने जाएगी।
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सुरेंद्र कोली के घर के पीछे वाले नाले की तलाशी करते लोग
इसके बाद से उसका कुछ पता नहीं चला। 24 दिसंबर 2006 को जब ‘खूनी कोठी’ के पीछे नाले से पुलिस ने 16 मानव खोपड़ियां बरामद कीं तो प्रयोगशाला जांच के बाद पता चला कि उनमें से एक खोपड़ी उक्त लापता महिला की भी थी।
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निठारी कांड में जिन बच्चों की गई जान उनके परिजन
निठारी प्रकरण के मामलों में अभियोजन की ओर से पैरवी करने वाले सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि महिला पहले भी पंधेर की इस कोठी पर झाडू-पोंछे का काम करती थी, मगर बाद में प्रेगनेंसी के चलते उसने काम छोड़ दिया था। बच्चे को जन्म देने के कुछ माह बाद वह दोबारा इस कोठी पर काम करना चाहती थी।
सुरेंद्र कोली ने उससे बात भी की थी। इसी के चलते वह काम की बात करने डी-5 पर गई और फिर कभी लौटकर नहीं आई।29 दिसंबर 2006 को निठारी कांड खुलने के बाद आरोपी कोली ने कोठी के पीछे गैलरी से भी काफी सामान बरामद कराया था। इसमें कपडे़, चप्पल, जूते आदि शामिल थे।
इसमें एक साड़ी वह भी बरामद हुई थी, जिसे घटना वाले दिन लापता महिला पहनकर घर से निकली थी। यह साड़ी उसे पास ही एक दूसरी कोठी में रहने वाली महिला ने पहनने के लिए दी थी। डीएनए टेस्ट से चूंकि लापता महिला की सटीक जानकारी नहीं मिल सकी थी, ऐसे में उसका एक फोटो और बरामद खोपड़ियां चंडीगढ़ सीएफएसएल भेजी गईं।