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तस्वीरें: 26 साल के शैगी के गुर्गे चला रहे फर्जी कॉल सेंटर, ऐसे करते थे ठगी

Sat, 22 Dec 2018 04:14 AM IST
vivek shukla ब्यूरो, अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो, अमर उजाला, नोएडा Published by: vivek shukla Updated Sat, 22 Dec 2018 04:14 AM IST
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fake call center running by Shaggy boys in Noida
fake call - फोटो : amar ujala

दुनियाभर के लोगों को फर्जी कॉल सेंटर के जरिये ठगने वाला मास्टरमाइंड गुजरात निवासी 26 साल का सागर ठक्कर उर्फ शैगी है। नोएडा पुलिस की जांच में यह पता चला है कि शैगी दुबई में रहने वाले आका के साथ मिलकर इस नेटवर्क को चला रहा है। सेक्टर-63 में जिस कॉल सेंटर को पुलिस ने पकड़ा है। उसके संचालक नरेंद्र पाहुजा और जिम्मी असीजा भी शैगी के ही गुर्गे हैं। शैगी के निर्देशन में ही यह गोरखधंधा चल रहा था। दुबई में बैठे आका के बारे में अभी नोएडा पुलिस पता लगा रही है।

fake call center running by Shaggy boys in Noida
fake call - फोटो : amar ujala

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में पता चला है कि शैगी ने 16 साल की उम्र में ही कॉल सेंटर एक्सपर्ट जगदीश कनानी से कॉल सेंटर के गुर सीख लिए थे। जगदीश भी इस तरह के फ्रॉड का आरोपी रहा है। शैगी बहुत ही कम समय में इस काले कारोबार का बड़ा नाम हो गया। देखते ही देखते उसने मुंबई, अहमदाबाद, गुरुग्राम, ठाणे, दिल्ली, नोएडा में अपने पैर जमा लिए और अपने लोगों के माध्यम से उसके निर्देशन में कॉल सेंटर चलने लगे। इस दौरान शैगी का महाराष्ट्र में करोड़ों रुपये के कॉल सेंटर स्कैम में भी नाम आया और वर्ष 2016 में ठाणे पुलिस ने उसे उस वक्त गिरफ्तार कर लिया, जब वह दुबई से मुंबई पहुंचा था। वह लग्जरी लाइफ व पार्टी करने का शौकीन है। उसने अपनी गर्ल फ्रैंड को ढाई करोड़ की ऑडी भी गिफ्ट की है और एक क्रिकेटर की ऑडी भी खरीद चुका है।

शैगी का नोएडा कनेक्शन
शैगी ने देशभर के सैकड़ों लोगों को अपने नेटवर्क में रखा। पिछले कुछ वर्षों से नोएडा व गुरुग्राम में कॉल सेंटर के धंधे में उतर गया। शैगी ही अमेरिकी नागरिकों का डाटा और हवाला के जरिये पैसे भिजवाने का काम कराता है। कॉल सेंटर मालिक नरेंद्र पाहुजा और जिम्मी असीजा की गिरफ्तारी के बाद और भी कई खुलासे होंगे।

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fake call - फोटो : amar ujala

ऐसे करते थे ठगी
पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी जिस शख्स से बात करते थे। उसकी पूरी डिटेल प्राप्त कर लेते थे। जब अमेरिकी नागरिक से बात करते थे तो खुद को एफबीआई का अधिकारी बताते थे और कहते थे कि आपके एसएसएन नंबर से क्रिमिनल एक्टिविटी हो रही है। इसमें ड्रग्स सप्लाई भी शामिल है। अमेरिका में ड्रग्स सप्लाई के आरोपियों के खिलाफ बहुत कड़े प्रावधान हैं। इसके बाद अमेरिकी नागरिक डरकर पैसे भेज देते थे।

पूर्वोत्तर राज्यों के हैं अधिकतर कर्मचारी
इस कॉल सेंटर में काम करने वाले अधिकतर कर्मचारी पूर्वोत्तर के रहने वाले हैं। नगालैंड, मिजोरम के रहने वाले ये युवक-युवती अमेरिकी शैली में फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं। इसके अलावा मुंबई, गुरुग्राम व दिल्ली के लोग भी यहां काम कर रहे थे।

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fake call - फोटो : amar ujala
15-22 हजार की सैलरी
पकड़े गए कॉल सेंटर में काम करने वाले लोगों को प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से हायर किया जाता था। इसके अलावा कई ऐसे युवक युवतियों को भी रखा जाता था जो किसी परिचित के माध्यम से आते थे। इनकी सैलरी 15 से 22 हजार रुपये थी। अधिक काम करने पर 1 फीसदी अतिरिक्त दिया जाता था। इनका काम टेलीकॉलर का होता था। टेलीकॉलर को कई टीमों में रखा जाता था। इसके लिए टीम लीडर भी रखे जाते थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में चार टीम लीडर भी शामिल हैं।

दुबई, यूएस, चीन का नेटवर्क
पुलिस की जांच में यह पता चला है कि इस गिरोह का नेटवर्क कई देशों में हैं। मसलन, आका दुबई में रहता है और वह अपने मास्टर माइंड शैगी के सहयोग से पूरे नेटवर्क पर नजर रखता है। वहीं, ये लोग ठगी के पैसे खाते या पेपाल गेट-वे से नहीं मंगाकर प्ले स्टोर कार्ड से मंगवाते थे। इस कार्ड को कैश कराने का काम दुबई या चीन में होता था। वहां से ये पैसे हवाला के माध्यम से भारत आता था।
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fake call - फोटो : amar ujala
वॉयस मेल से मेसेज
कॉल सेंटर के कर्मचारी अमेरिकी नागरिकों को वॉयस मेल व पॉप अप मेसेज से संपर्क करते थे। इसमें खुद को एफबीआई का अधिकारी बताकर मेसेज भेज देते थे। मेसेज में वह अमेरिकी पुलिस से इतना डरा देते थे कि वह पैसे देने को राजी हो जाते थे। वॉयस मेल व पॉप अप मेसेज भेजने के पीछे मकसद यह होता था कि अमेरिकी नागरिक को यह पता नहीं सके कि कॉलर कहां का है।

ट्रू पीपल पर सर्च
आरोपी पूरी योजनाबद्ध तरीके से अमेरिकी नागरिकों को फंसाते थे। पहले उनका नाम व नंबर और अन्य डिटेल्स लेते थे। उन्हें ट्र पीपुल और ट्रू कॉलर पर सर्च करते थे। जब उनसे कॉल सेंटर कर्मचारी बात करते थे तो सीधे उनके नाम से संबोधित करते थे। इससे उन्हें लगता था कि अमेरिकी पुलिस के अधिकारी ही फोन कर रहे हैं।

 
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