सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने के बाद से ही राजधानी के पटाखा दुकानदार असमंजस की स्थिति में हैं। लाखों के पटाखों का स्टॉक रखने वाले थोक व रिटेल दुकानदारों के आगे रोजी-रोटी का संकट आ गया है।
'कोई हल नहीं निकला, तो सदर बाजार जाम कर सड़कों पर बेचेंगे पटाखे'
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हालांकि सोमवार को फैसला आने के बावजूद सदर बाजार, जामा मस्जिद व अन्य स्थानों पर दिनभर पटाखों की बिक्री जारी रही, लेकिन देर शाम पुलिस ने जबरन दुकानों को बंद करवा दिया। कुछ स्थानों पर पुलिस ने बिक्री पर रोक लगाने का प्रयास किया, तो दुकानदारों के विरोध के चलते पुलिस को वापस जाना पड़ा। दुकानदारों ने आत्मदाह तक की धमकी दे दी।
सदर बाजार पटाखा एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने यदि रोक लगानी ही थी, तो एक माह पहले लाइसेंस रिन्यू करवाने की इजाजत क्यों दी। सदर बाजार में हर वर्ष 74 दुकानदारों को लाइसेंस मिलता है, जबकि इस बार मात्र 24 दुकानदारों को मिला है।
इनमें से ऐसे दुकानदार ज्यादा हैं, जो एक माह के लिए किराये की दुकान लेकर पटाखों का स्टॉक भरते हैं। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अब अपना फैसला बदलकर दुकानदारों के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस आई थी, लेकिन सभी दुकानदारों के विरोध के बाद वापस चली गई। हम हर स्तर पर दुकानें बंद करवाने का विरोध करेंगे।
दुकानदार हरजीत सिंह छाबड़ा ने सवाल उठाया कि यदि हमें लाइसेेंस ही न मिलते, तो हम स्टॉक न भरते। अब पटाखे कहां रखें और कहां बेचें। यह बारूद है, यदि कोई घटना हो गई तो कौन जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा कि पटाखे मात्र दीवाली पर ही जलाए जाते हैं, तो उससे प्रदूषण कैसा। यदि प्रदूषण ही रोकना है, तो प्रतिदिन दिल्ली में आने वाले 1500 ट्रकों पर बैन लगना चाहिए, क्या उनसे प्रदूषण नहीं फैलता। एक नवंबर के बाद कौन पटाखे खरीदेगा।