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सफल सर्जरी: गंभीर रूप से घायल युवती को सर्जरी के बाद मिला नया जीवन, डॉक्टर ने बताई इलाज की जटिलता की कहानी

Thu, 27 Aug 2026 06:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 27 Aug 2026 06:54 AM IST
सार

सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 21 वर्षीय युवती को एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने तीन घंटे की जटिल इमरजेंसी सर्जरी कर नई जिंदगी दी है।

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Critically injured young woman gets a new lease of life after surgery
demo - फोटो : Freepik.com

विस्तार

सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 21 वर्षीय युवती को एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने तीन घंटे की जटिल इमरजेंसी सर्जरी कर नई जिंदगी दी है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के चिक्सोली गांव की रहने वाली युवती के कपड़े ट्रैक्टर के पहिये में फंस गए थे, जिससे वह काफी दूर तक घिसटती चली गई। 

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इस भयावह हादसे में युवती के पेट का डायफ्राम फट गया था और पेट व बड़ी आंत खिसककर छाती में पहुंच गई थी। इसके अलावा आंत में छेद होने और अत्यधिक खून बहने के कारण उसकी हालत बेहद नाजुक थी। अस्पताल लाते ही डॉ. अर्जुन गोयल के नेतृत्व में सर्जिकल टीम ने बिना देरी किए युवती को ऑपरेशन थियेटर में शिफ्ट किया। 
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करीब तीन घंटे चली सर्जरी में डॉक्टरों ने फटे हुए डायफ्राम को ठीक किया और छाती में पहुंचे अंगों (पेट और बड़ी आंत) को वापस पेट में अपनी जगह पर स्थापित किया। छोटी आंत के क्षतिग्रस्त हिस्से को काटकर दोबारा जोड़ा गया और पैर के गंभीर घाव को ठीक करने के लिए विशेष वैक्यूम थेरेपी दी गई। 
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एक बहुत ही दुर्लभ और जानलेवा मेडिकल स्थिति में, सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टरों ने 21 साल की एक महिला की जान बचाई। महिला के कपड़े चलते हुए ट्रैक्टर के पहिये में फंस गए थे, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गई थी। फरीदाबाद के सेक्टर 8 स्थित सर्वोदय अस्पताल में जनरल और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट और हेड (यूनिट II) डॉ. अर्जुन गोयल ने बताया कि यह एक बहुत ही मुश्किल सर्जरी थी। 

बकौल डॉ. अर्जुल इलाज के दौरान हमारे सामने कई चुनौतियां आईं... क्योंकि यह मामला बहुत दुर्लभ था, इसलिए इससे निपटना भी बहुत चुनौतीपूर्ण था। हमने इसे भगवान का चमत्कार माना। जब मरीज हमारे अस्पताल पहुंची, तो वह लगभग मर चुकी थी... उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया। उसका लगभग 2 से 2.5 लीटर खून बह चुका था। हमने तुरंत उसकी सर्जरी की योजना बनाई। वह लगभग दो हफ़्ते तक हमारे अस्पताल में रही। उसे कई सर्जरी करवानी पड़ीं क्योंकि उसे कई जगहों पर चोटें आई थीं। मरीज का हौसला बहुत बुलंद था, इसलिए वह अच्छी तरह ठीक हो पाई। अब वह बिल्कुल ठीक-ठाक बैठी है।

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