फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

तस्वीरें: इससे अच्छा था गांव ही चला जाता, मजदूर बोले-घर पर बैठने से कोरोना से तो बच जाएंगे, पर भूख नहीं छोड़ेगी

Wed, 25 Mar 2020 11:24 AM IST
शाहरुख खान संतोष कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
संतोष कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 25 Mar 2020 11:24 AM IST
विज्ञापन
coronavirus latest news in hindi Work of daily laborers closed due to lock down
रिक्शे पर बैठे मजूदर - फोटो : अमर उजाला
तीन दिन होने को हैं। दो छोटे-छोटे बच्चों व पत्नी के साथ 15 गुना 8 के कमरे में बंद है। अपने गांव में रहता तो कम से कम खुली हवा में सांस तो ले पाता और पेट भी खाली नहीं रहता। ये बातें कहते-कहते मुकेश मिश्रा का गला भर आया। उनकी नजर कभी बेटी पर जा टिकती तो कभी बेटे पर। अपने घर बिहार के सहरसा से करीब 1,200 किमी दूर दिल्ली के जनकपुरी इलाके में मुकेश रिक्शा चलाता है। 
coronavirus latest news in hindi Work of daily laborers closed due to lock down
रिक्शे पर बैठा मजूदर - फोटो : अमर उजाला
परिवार भी साथ है। रोज करीब 300 कमाते हैं, जिससे घर का खर्च चल जाता है। लॉक डाउन से पैदा हुई परेशानी पर कुरेदते ही सपाट सा जवाब दिया घर बैठने पर कोरोना वायरस से तो बच जाएंगे, लेकिन भूख कहीं का नहीं छोड़ेगी। शनिवार से ही सड़कें सूनी पड़ी हैं। चार दिन से काम बंद है। घर जाने को सोचा तो ट्रेन भी बंद हो गई।
 
coronavirus latest news in hindi Work of daily laborers closed due to lock down
फाइल फोटो
यह कहानी सिर्फ मुकेश की नहीं, दिल्ली-एनसीआर में दैनिक कमाई पर गुजर करने वाले लाखों मजदूरों की है, जिनका कामधंधा कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से बचने के लिए एहतियातन उठाए जा रहे कदमों से पिछले तीन दिनों से पूरी तरह से ठप है। शहर में कर्फ्यू लगा हुआ है। संक्रमण के स्टेज तीन में जाने की आशंका को देखते हुए सड़क पर किसी को आने-जाने नहीं दिया जा रहा है। इससे दैनिक मजदूरों की रोजी रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
coronavirus latest news in hindi Work of daily laborers closed due to lock down
फाइल फोटो
यूपी के सहारनपुर के महेंद्र पाल का कहना है, तीन दिन से बिलकुल भी कमाई नहीं हुई। पैसा न होने से राशन वाला भी कल से ही अनाज देने में आनाकानी कर रहा है। इससे अच्छा था गांव चला जाता, जहां कम से कम खाने के लाले तो न पड़ते। आस पड़ोस वाले ही वहां खाने का इंतजाम कर देते। लेकिन बिना ट्रेन व बस चले वापस लौटना भी संभव नहीं है।
सहरसा के ही रवि शर्मा का कहना है, तीन-चार दोस्तों के साथ एक कमरे में कब तक रहा जा सकता है। सभी रोज मजदूरी करते हैं और रोज के खर्च से जो बच जाता है उसे घर भेज देते हैं। अब काम धंधा कुछ है नहीं और कब तक होगा, यह भी नहीं पता। पहले मालूम होता तो घर लौट जाता। वहां कम से कम फांका मारने की नौबत तो नहीं आती।
 
विज्ञापन

बंदी से लोगों को शहर में ही रोकने की कोशिश

coronavirus latest news in hindi Work of daily laborers closed due to lock down
अरविंद केजरीवाल - फोटो : एएनआई
सरकार मानकर चल रही है कि शहर से अगर गांव की तरफ जाना जाने वाले लोगों की संख्या अचानक बढ़ती है और इनके जरिये वायरस का संक्रमण ग्रामीण इलाकों में भी फैलता है तो हालात को काबू कर पाना आसान नहीं होगा। इसी वजह से ट्रांसपोर्ट के सभी माध्यम, हवाई, रेल व सड़क, बंद कर दिए गए हैं। साथ ही लोगों से अपील की जा रही है कि लोग जहां पर हैं, वहीं पर अपने घरों में रहें। लोगों से मेलजोल ज्यादा न बढ़ाए। इसे कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने का रामबाण तरीका बताया जा रहा है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed