कांचहि बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए, दर्शन दीन्हीं ना अपन ये छठी मइया जैसे गीत गाकर महिलाओं द्वारा सूर्य की उपासना की गई। छठ महापर्व को उत्साह पूर्वक मनाने के लिए बिहार व पूर्वांचल के लोगों ने शुक्रवार की शाम घरों की छत पर टब में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई, जबकि छठ पर्व के आखिरी दिन शनिवार की सुबह उगते सूर्य की आराधना की जाएगी। देखें तस्वीरें कोरोनाकाल में किस खास अंदाज में मनाया गया छठ पर्व....
2 of 14
घर की छत पर पूजा करती महिलाएं
- फोटो : सुमित सिसोदिया
दिल्ली-एनसीआर में करीब छह लाख लोग पूर्वांचल के लोग रहते हैं। हर साल धूमधाम से छठ महोत्सव मनाया जाता है। इस बार कोरोना महामारी श्रद्धालुओं की आस्था में बाधा बनकर खड़ी हो गई, मगर श्रद्धालुओं का हौंसला नहीं डगमगा सकी। शुक्रवार को व्रति महिलाओं ने गन्ने के मंडप सजाकर उसमें विभिन्न प्रकार के फलों और पकवानों को रखकर पूजा-अर्चना की।
3 of 14
घर की छत पर पूजा करतीं व्रती महिला
- फोटो : सुमित सिसोदिया
किसी ने अपने छत पर, तो किसी ने बालकनी में तो किसी ने अपनी गलि में ही टब, रबर के पूल या कृत्रिम तालाब में डूबते सूरज को अर्घ्य देते हुए पूजा की।
4 of 14
छठ पूजा 2020
- फोटो : अमर उजाला
सूर्य देव के डूबने से पहले महिलाओं ने जल से भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दिया। गांधी कॉलोनी में पंडित लक्ष्मी नारायण ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई। इसके साथ ही सूर्य की उपासना की कहानी सुनाई। इस दौरान महिलाओं ने घर की छतों पर नहाने के टब में दीपदान भी किया।
5 of 14
डूबते सूरज को अर्घ्य देती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
प्रशासन की नहीं मिली मंजूरी, छठ घाट रखे सूने
जिले में शुक्रवार को एसजीएम नगर, खेड़ीपुल, अशोका एंक्लेव, सेक्टर-3 , 7, 22, 23, राजीव कॉलोनी, सेक्टर-46 और 48 बनाए गए छठ घाट सूने रहे। हर साल श्रद्धालुओं इन तालाबों (घाट) के पानी में खड़े होकर डूबते सूरज को अर्घ्य देते है। इन घाटों पर उत्सव का माहौल रहता है। परंपरागत गीतों की धूम तथा ढोलों की थाप के साथ श्रद्धालु पूजा स्थल पहुंचते है। श्रद्धालुओं आतिशबाजी करती है।