नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जामिया के विद्यार्थियों की ओर से किए जा रहे सत्याग्रह को शुक्रवार को महिलाओं समेत कई संगठनों का साथ मिला। जामिया विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा सीएए के विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ किए जा रहे सत्याग्रह के बीच रीडिंग फॉर रिवोल्यूशन मुहिम की शुरुआत की गई है। जामिया के छात्रों ने निर्णय लिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती, तब तक वह सड़कों पर पढ़ाई करेंगे। आने वाले दिनों में छात्रों की परीक्षाएं हैं। ऐसे में पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए छात्रों ने यहां रीडिंग फॉर रिवोल्यूशन मुहिम शुरू की है। इस मुहिम के तहत छात्रों ने सत्याग्रह स्थल पर एक पुस्तकालय स्थापित किया है। जहां से छात्र पुस्तकें लेकर पढ़ाई कर रहे हैं।
CAA: पूरी दिल्ली में हुए अनोखे प्रदर्शन, कहीं सड़कों पर चित्रकारी तो कहीं राजा या बागी बनने की पेशकश
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प्रदर्शनकारियों ने पाश और फैज की नज्में लिखीं चादरें फैलाकर पैदल मार्च निकाला। सावित्री बाई फुले के जन्मदिवस पर महिला फेडरेशन, जामिया, जेएनयू स्टूडेंट एसोसिएशन, नार्थ ईस्ट यूनाइटेड जस्टिस एंड पीस फेडरेशन, ट्रासजेंडर कम्यूनिटी और बिरसा-फुले स्टूडेंट एसोसिएशन से जुड़े लोग, खासकर महिलाओं ने मार्च में सीएए और केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की।
बीम बूम बूम- ध्यान से सुनो सेे खींचा ध्यान
संगवारी थियेटर ग्रुप ने बूम बूम बूम- ध्यान से सुनो गाकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। छात्रों ने सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि सरकार के जुल्म से उनका सत्याग्रह और मजबूत हो गया है।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि सीएए कानून बेशक देश के मुसलमानों के खिलाफ नहीं है, लेकिन यह देश के संविधान के मुताबिक बिल्कुल नहीं है। संविधान में लिखा है, हम भारत के लोग, लेकिन सीएए कानून देश के सभी लोगों को एक समान अधिकार नहीं देता है। छात्रों का कहना है कि देश के मुसलमानों को आखिर कब तक साबित करना पड़ेगा कि वह इसी देश के नागरिक हैं।
छात्रों का सत्याग्रह 21वें दिन भी लगातार जारी रहा। इस दौरान छात्रों ने सरकार को जगाने और अपना विरोध दर्ज कराने के लिए कई विशेष रास्ते अपनाये हैं। छात्रों ने जामिया व उसके आस-पास की सड़कों पर चित्रकारी की है। विश्वविद्यालय के गेट संख्या-10 पर प्रतिदिन पांच छात्र भूख हड़ताल कर रहे हैं। छात्रों का दावा है कि जब तक सरकार सीएए को समाप्त करने और पुलिस द्वारा उन पर की गई कार्रवाई की न्यायिक जांच कराने का आदेश नहीं देती, यह सत्याग्रह जारी रहेगा। ये किसका लहू है कौन मरा...साहिर लुधियानवी की लिखी यह नज्म जामिया के छात्रों ने सड़कों पर उकेरी है।