भारतीय परंपरा में मानव सेवा माधव सेवा है। असहाय व गरीबों की मदद करना हमारे स्वभाव, धर्म, देश और हम भारतीयों का अभिन्न अंग है। मैं बहुत खुश हूं कि अमर उजाला फाउंडेशन शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आम लोगों की मदद कर रहा है। यह बहुत बड़ी बात है। अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति योजना से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को अपने सपनों को पूरा करने में मदद मिलेगी। (सभी फोटो- जी पाल)
अमर उजाला ने दी मेधावी बच्चों के सपनों को उड़ान, अतुल माहेश्वरी छात्रवृति सम्मान समारोह किया आयोजित
व्रत और यज्ञ से जितना पुण्य मिलता है, उतना ही दूसरों की मदद करने से प्राप्त होता है। यह बात उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने बृहस्पतिवार को अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा आयोजित अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति 2017 सम्मान समारोह में मेधावी बच्चों को सम्मानित करते हुए कही।
उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में नायडू सबसे पहले छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले होनहार बच्चों के पास पहुंचे। सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देते हुए उनका अभिनंदन किया। नायडू ने कहा कि सरकार अकेले शिक्षा और स्वास्थ्य आदि के क्षेत्र में बदलाव नहीं ला सकती है। इसके लिए कारपोरेट घरानों, कंपनियों, एनजीओ समेत समाज के हर वर्ग को सहयोग करना चाहिए।
अमर उजाला देश का तीसरा सबसे बड़ा अखबार है, जो कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ में समाज में बदलाव लाने में लगातार प्रयासरत है। करीब 167 जिलों में छात्रवृत्ति के माध्यम से बच्चों की उच्च शिक्षा, ग्रामीण सेवा, कैंसर व रक्तदान कैंप के माध्यम से जागरूकता अभियान चल रहा है। उपराष्ट्रपति ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज आपके सपनों को अमर उजाला फाउंडेशन छात्रवृत्ति देकर पूरा कर रहा है। इसी प्रकार हम सबका कर्त्तव्य है कि हर कोई दूसरों के लिए सहयोग करें। खूब पैसा कमाएं और जीवन को जीएं, लेकिन उस पैसे से समाज के सहयोग पर भी खर्च करें।
खुशकिस्मती कि नायडू सर से मिला आशीर्वाद
उपराष्ट्रपति सर ने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। अमर उजाला फाउंडेशन के चलते मुझे यह मौका मिला है। सर ने पूछा कि छात्रवृत्ति से मिले पैसे का क्या करूंगी? तो मैंने कहा कि मैं इस छात्रवृत्ति से मिली धनराशि से फिजिक्स ऑनर्स में दाखिला लूंगी।
-इशिका सिंह, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश।
छात्रवृत्ति के चलते प्रोफेसर बनने का सपना होगा पूरा
मैं प्रोफेसर बनना चाहती हूं, लेकिन पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। इस छात्रवृत्ति के चलते अब मैं अपनी उच्च शिक्षा को पूरा करने का सपना देख रही हूं। मेरे जैसे अभावग्रस्त छात्र-छात्राओं के लिए यह छात्रवृत्ति एक वरदान है। -पूनम यादव, विशेष छात्र, एमएससी तृतीय वर्ष, इलाहाबाद।