एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के दोषी करार दिए जा चुके आशाराम का विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है। यह कोई इकलौता मामला नहीं है जिसकी वजह से आसाराम की यह दुर्गति हुई हो। आसाराम के स्कूलों में सैकड़ों बच्चों की जान तक जा चुकी है जिसकी वजह से आसाराम को काफी फजीहत झेलनी पड़ी थी। एक रिपोर्ट में यहां तक दावा किया गया था कि करीब 18 साल में उसके स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की रहस्यमयी तरीके से मौत हुई, जिसकी वजह काला जादू मानी गई।
सैकड़ों बच्चों की रहस्यमयी मौत
गौरतलब है कि साल 2001 के बाद अचानक आसाराम के स्कूलों में बच्चों की संदिग्ध मौतें होने लगीं। केवल महाराष्ट्र में ही आसाराम के गुरुकुल के 700 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी। इनमें से अधिकतर सांप या बिच्छू के काटने से मौते हुईं। इसके अलावा छोटी-मोटी बीमारियों से भी मौते हुईं।
जब मामला ज्यादा गरमा गया तो सरकारों की नींद जागी। उस वक्त की सरकार ने सामाजिक एवं अधिकारिता मामलों की संसदीय स्थायी समिति बनाई जिसने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की। समिति ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। इसके अनुसार आशाराम के गुरुकुल में 2001-2002 और 2011-12 के समय में कुल 793 बच्चों ने अपनी जान गंवाई। मरने वालों में सबसे ज्यादा बच्चे आदिवासी थे। समिति की रिपोर्ट के बाद आसाराम के अलग-अलग गुरुकुलों से 75 कर्मचारियों को निकाला गया।
दिल्ली आते हुए प्लेन में की नौटंकी
कुछ समय पहले जब आसाराम को जोधपुर से विमान में बैठाकर दिल्ली लाया जा रहा था तो उसने भयंकर ड्रामा किया था। जहाज में कुल 70 सीटें थीं जिसमें से 35 पर आसाराम के समर्थक बैठे थे। जैसे ही विमान उड़ा आसाराम के भक्त उसका पैर छूने के लिए भगदड़ मचाने लगे और भजन भी गाने लगे।
आसाराम के समर्थकों के हुड़दंग से प्लेन का संतुलन बिगड़ने लगा तो पायलट ने सबको सीट बेल्ट बांधकर अपनी सीट पर बैठने को कहा। उस वक्त प्लेन में जो पुलिसकर्मी थे उन्होंने बताया कि जब समर्थक शांत हो जा रहे थे तो पुलिस को परेशान करने के लिए आसाराम उन्हें इशारे करता और फिर हंगामा बढ़ जाता। फिर वह खुद हंगामा शांत कराने लगता। पूरी यात्रा में पुलिसवालों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।