राजस्थान के जोधपुर हाईकोर्ट में 25 अप्रैल को आसाराम के जिस केस का फैसला सुनाया जाना है उसकी सबसे पहली कड़ी का जुड़ाव दिल्ली से ही है। कहा जा सकता है कि यह केस दिल्ली में ही अस्तित्व में आया था। जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...
दिल्ली से भी जुड़े हैं आसाराम के उस केस के तार जिसमें कल जोधपुर कोर्ट सुनाने वाली है फैसला
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अगस्त 2013 में आसाराम के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करवाने वाला शाहजहांपुर निवासी पीड़िता का पूरा परिवार घटना से पहले तक आसाराम का कट्टर भक्त था। पीड़िता के पिता ने अपने खर्चे पर शाहजहांपुर में आसाराम का आश्रम बनवाया था। 'संस्कारवान शिक्षा' की उम्मीद में उन्होंने अपने दो बच्चों को आसाराम के छिंदवाडा स्थित गुरुकुल में पढ़ने के लिए भेजा था। 7 अगस्त 2013 को पीड़िता के पिता को छिंदवाडा गुरुकुल से एक फोन आया। फोन पर उन्हें बताया गया कि उनकी 16 वर्षीय बेटी बीमार है। अगले दिन जब पीड़िता के माता पिता छिंदवाडा गुरुकुल पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी पर भूत-प्रेत का साया है जिसे आसाराम ही ठीक कर सकते हैं।
14 अगस्त को पीड़िता का परिवार आसाराम से मिलने उनके जोधपुर आश्रम पहुंचा। मुकदमे में दायर चार्जशीट के अनुसार आसाराम ने 15 अगस्त की शाम 16 वर्षीय पीड़िता को 'ठीक' करने के बहाने से अपनी कुटिया में बुलाकर बलात्कार किया। पीड़िता के परिवार की मानें तो उनके लिए यह घटना उनके भगवान के भक्षक में बदल जाने जैसी ही थी। इसके बाद परिवार ने आसाराम के खिलाफ पुलिस में जाने की ठान ली। तब 20 अगस्त को 16 वर्षीय रेप पीड़िता अपने माता-पिता के साथ दिल्ली के कमला नगर थाने गई और स्वघोषित भगवान आसाराम के खिलाफ "जीरो एफआईआर" दर्ज कराई।
हालांकि यह मामला जोधपुर का था तो दिल्ली पुलिस ने बाद में इसे जोधपुर पुलिस को ट्रांसफर कर दिया और तब से अब तक ये केस चल रहा है। इस परिवार ने सुनवाई के बीते पांच साल अपने घर में नजरबंद बंधकों की तरह बिताए हैं। परिवार के मुताबिक उन्हें रिश्वत की पेशकश की गई और जान से मार देने की धमकी भी दी गई, लेकिन वे अपने से कई गुना ज्यादा प्रभावशाली आसाराम के खिलाफ जारी अपनी न्यायिक लड़ाई में डटे रहे।
गवाहों की हत्या का मामला
28 फरवरी 2014 की सुबह आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली सूरत निवासी दो बहनों में से एक के पति पर सूरत शहर में ही जानलेवा हमला हुआ। 15 दिन के भीतर ही अगला हमला राकेश पटेल नामक आसाराम के वीडियोग्राफर पर हुआ। दूसरे हमले के कुछ दिनों बाद ही दिनेश भगनानी नामक तीसरे गवाह पर सूरत के कपड़ा बाजार में तेजाब फेंका गया। यह तीनों गवाह खुद पर हुए इन जानलेवा हमलों के बाद भी बच गए। इसके बाद 23 मई 2014 को आसाराम के निजी सचिव के तौर पर काम कर चुके अमृत प्रजापति पर चौथा हमला किया गया।