दिल्ली को एजुकेशन हब माना जाता है और पूरे देश से छात्र पढ़ने व मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, शकरपुर, मोरिस नगर, नेब सराय, मुनिरका, पांडव नगर, जामिया नगर, उत्तम नगर, जनकपुरी, रोहिणी, पीतमपुरा समेत कई इलाकों में बने कोचिंग सेंटरों में छात्र तैयारी करने आते हैं। जहां अनाज मंडी की फैक्टरी में हर फ्लोर पर पांच कमरे बनाकर करीब 100 लोगों को रखा जा रहा था तो राजधानी में चल रहे हजारों अवैध पेइंग गेस्ट (पीजी) भी इनसे पीछे नहीं हैं। यहां हर फ्लोर पर तीन से चार कमरे बनाकर 50 से 70 छात्रों को रखा जाता है।
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जामिया नगर स्थित पीजी
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार को लक्ष्मी नगर, शकरपुर, मुखर्जी नगर, जामिया नगर समेत कई इलाकों में चल रहे पीजी और कोचिंग सेंटरों में मौजूद खतरों की पड़ताल की। संकरी गलियों में तारों के गुच्छों के बीच संकरी सीढ़ी से पीजी में जाने और आने का एक ही रास्ता था। ज्यादातर इमारतों में सीढ़ी पर ही बिजली के मीटर और तारों के जंजाल थे। यहां न तो कोई अग्निशमन यंत्र था और न ही बचाव के कोई दूसरे इंतजाम।
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जामिया नगर स्थित कोचिंग सेंटर
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पूर्वी दिल्ली का लक्ष्मी नगर इलाका सीए और सीएस की कोचिंग के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। यहां एक पीजी में रहने वाले सुनील ने बताया कि वह तीन साल से पीजी में रह रहा है। हर फ्लोर पर चार कमरे हैं, जहां चार-चार बेड हैं। वह वहां रहने और खाने के 12 हजार रुपये देता है। उसने बताया कि उसके पीजी में वेंटीलेशन की व्यवस्था नहीं है, गर्मियों में बहुत परेशानी होती है।
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गर्ल्स पीजी
- फोटो : अमर उजाला
दूसरे पीजी में भी हालात ऐसे ही मिले। यहां बिजली व पानी की आपूर्ति घरेलू कनेक्शन से हो रही थी। पीजी में खाना बनाने के लिए ग्राउंड फ्लोर रसोईयां बनाई गई हैं। इससे यहां हादसों की आशंका बनी रहती है। पड़ोसियों का दावा था कि यह सब कुछ पुलिस, बिजली विभाग और एमसीडी की मिलीभगत से चलता है।
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जामिया नगर स्थित कोचिंग सेंटर
- फोटो : अमर उजाला
राजधानी में 33 कोचिंग सेंटर में मिलीं खामियां...
दिल्ली सरकार ने गुजरात हादसे के बाद नियमों की अनदेखी कर चलाए जा रहे कोचिंग सेंटरों की पहचान करने के लिए कहा था। दमकल विभाग ने जब जांच शुरू की तो महज 33 कोचिंग सेंटर ही ऐसे मिले थे जिनमें नियमों की अनदेखी की जा रही थी। दमकल विभाग का कहना है कि दिल्ली में चल रहे कोचिंग सेंटर दिल्ली फायर सेफ्टी एक्ट से बाहर हैं क्योंकि इनमें से ज्यादातर रिहायशी इलाकों में हैं और इनकी ऊंचाई 15 मीटर से कम है। दमकल विभाग केवल 15 मीटर से ऊंचे कोचिंग सेंटर में ही नियमों की जांच कर सकता है।