काठीखेड़ा में सैनिटरी पैड बनाने वाली लड़कियों पर बनी फिल्म को ऑस्कर अवार्ड मिलने के बाद से गांव में जश्न का माहौल है। वहीं अच्छेजा में इस कारोबार से जुड़ी लड़कियों का दुर्भाग्य ही है कि उनके द्वारा तैयार पैड बिक नहीं रहे जिस कारण उद्योग बंद है। परिणामस्वरूप अधिकांश लड़कियां आलू खोदने समेत अन्य मजदूरी करने को मजबूर हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
काठीखेड़ा की बहू सुमन के सबला स्वयं समूह में सैनिटरी पैड बनाने का काम करने वाली स्नेह का उसके भाग्य ने खूब साथ दिया। उन पर बनी फिल्म को ऑस्कर अवार्ड मिलने के बाद वह रातों रात स्टार बन गईं और आजकल दोनों अमेरिका में हैं। इसी तरह के सैनिटर पैड बनाने का कारोबार यहां के निकटवर्ती गांव अच्छेजा के पंचायत उद्योग में दिशा स्वयं समूह से जुड़ी लड़कियों से कराया जाता रहा है।
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sneh and suman
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इससे उनका दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि उन पर शूट हुई फिल्म का कहीं जिक्र तक नहीं है, कोई अवार्ड तो दूर की बात है। उधर उनके द्वारा तैयार सैनिटरी और मैटरनिटी पैड बिक नहीं रहे जिससे उद्योग में करीब दो माह से अकसर ताला जड़ा है। परिणामस्वरूप इस समूह की कई लड़कियां आलू खोदने समेत अन्य मजदूरी करने को मजबूर हैं। उल्लेखनीय है कि इस समूह में जायदा, गुलशमा, शायरा बानो, प्रीति, नसरीन, अफसाना, रिहाना आदि लड़कियां काम करती हैं।
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इस समूह की संचालक नरगिस का कहना है कि लगभग आठ लाख रुपये का माल तैयार होकर गोदाम में पड़ा है। उसकी बिक्री का प्रशासन ने कोई बंदोबस्त नहीं कराया। ऐसे में जब कोई काम नहीं मिला तो कई लड़कियां मजबूरी में आलू खोदकर अपना खर्च चला रही हैं। क्योंकि जब से उक्त लड़कियां पैड बनाने का काम करने लगीं और पैसे मिलने लगे, वह बेरोजगार रहना सहन नहीं करतीं। नरगिस ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि उनके उत्पाद को बिकवाने में सहयोग कर लड़कियों का हौसला बढ़ाएं।
इस उद्योग के पंचायत विभाग की ओर से सहायक व्यवस्थापक सुशील कुमार का कहना है कि पहले दिशा समूह के सैनिटरी और मैटरनिटी पैड सहज बिक जाते थे जिनकी सप्लाई बागपत, नोएडा, शामली और मुजफ्फनगर जिलों में भी थी, लेकिन अब जैम पोर्टल के माध्यम से उक्त जिलों में किसी अन्य संस्था के पैड खरीदे जाने लगे हैं जिस पर यहां के उद्योग का रजिस्ट्रेशन नहीं पाया है।