दिल्लीवालों को दिवाली के बाद जिस चीज का इंतजार बिल्कुल नहीं था वही उन्हें सुबह उठने के बाद दिखाई दिया। दिल्ली-एनसीआर को जहरीले धुंध की मोटी चादर ने ढक लिया है और हवा की गुणवत्ता बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि आनंद विहार और मेजर ध्यानचंद स्टेडियम जैसे इलाकों में वायु गुणवत्ता 999 दर्ज की गई वहीं चाणक्यपुरी में 459 दर्ज की गई। खतरनाक स्तर पर पहुंचे प्रदूषण को कम करने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने आनंद विहार इलाके में पानी का छिड़काव किया।
दिल्ली में वायु का 'आपातकाल', गुणवत्ता सूचकांक ने पार किया 1000 का आंकड़ा, की जा रही पानी की बौछार
आनंद विहार में जिस तरह की वायु गुणवत्ता है उसमें सांस लेने वाला करीब 45 सिगरेट के बराबर धुआं पी रहा है। दिल्ली में ये हाल तब है जब सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के बारे में आदेश दिया था कि सिर्फ ग्रीन पटाखे जलाए जाएंगे और वो भी 2 घंटे। लेकिन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए घंटों तक पटाखे जलाए और वो भी रेड पटाखे(सामान्य रूप से मिलने वाले पटाखे जिसमें केमिकल की मात्रा ज्यादा होती है)।
Delhi: Workers of Public Works Department (PWD) sprinkle water in Anand Vihar area to settle the dust as a pollution control measure. pic.twitter.com/DsD88wp9oJ
वहीं खबर है कि नोएडा में पटाखे जलाने के लिए कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया लेकिन इन सब का भी कोई असर न दिखा और लोगों ने जमकर पटाखे जलाए। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) के अनुसार कल रात 11 बजे के करीब दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता 302 यानी बहुत खराब(वेरी पुअर) से खराब(पुअर) के बीच रही।
इस समय दिल्ली के हवा की जैसी स्थिति है उसके अनुसार यह सांस से जुड़ी बीमारियों के रोगियों के लिए जानलेवा है। यही नहीं स्वस्थ्य लोगों के लिए भी यह बेहद खतरनाक है। वातावरण में बढ़ गये प्रदूषण से होने वाले नुकसान पर रोशनी डालते हुए मशहूर छाती और श्वांस रोग विशेष डा एस के कटियार ने गुरूवार को 'भाषा' को बताया कि पटाखों के धुएं से बुजुर्ग लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि यह धुआं अस्थमा और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से पीड़ित रोगियों के लिये काफी नुकसान देह है। विशेषकर दमा से पीड़ित बच्चों और बुजुर्ग लोगों को इससे काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बुधवार की रात ‘बेहद खराब’ की श्रेणी की तरफ बढ़ गयी। राष्ट्रीय राजधानी के कई इलाके में लोगों ने रात आठ से दस बजे के बीच पटाखा फोड़ने के लिये उच्चतम न्यायालय द्वारा तय की गई समय-सीमा का उल्लंघन किया। दिल्ली में बुधवार रात दस बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 296 दर्ज किया गया।