साल 2012 में मानेसर स्थित मारुति सुजुकी के प्लांट में भड़की हिंसा और उसके बाद हुई आगजनी मामले में कोर्ट ने आज 148 आरोपियों में से 31 लोगों को दोषी करार दे दिया है। अन्य को कोर्ट ने रिहा कर दिया। आइए जानते हैं 2012 में कैसे भड़की थी वो हिंसा जिसने बाद में प्लांट के महाप्रबंधक की जान ले ली थी। (सभी फोटोः जितेंद्र राठी/अमर उजाला)
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जला हुआ मारुति प्लांट
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गौरतलब है कि उस साल प्लांट का सुपरवाइजर कम वेतन पर अस्थाई कर्मचारियों की भर्ती कर रहा था जिसकी वजह से प्लांट में पहले से कार्यरत श्रमिक नाराज थे। इसी कारण एक श्रमिक और सुपरवाइज के बीच विवाद हो गया। जो बाद में खूनी हिंसा में तब्दील हो गई।
बेरहमी से पिटाई के बाद जिंदा जले थे जीएम
मानेसर के मारुति कारखाने में बुधवार शाम श्रमिकों की मारपीट व आगजनी के बाद मिला शव कंपनी के महाप्रबंधक [एचआर] अवनीश कुमार देव का निकला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके जिंदा जलने की बात सामने आई। शव की पहचान महाप्रबंधक के साले ने होठ, दांत और झुलसने बचे गाल के थोड़े से हिस्से पर निशान देखकर की।
गौरतलब है कि श्रमिक व सुपरवाइजर के बीच साल 2012 में विवाद हुआ था तो उसके बाद यूनियन नेताओं के भड़काने पर श्रमिकों के तांडव के बाद से महाप्रबंधक अवनीश कुमार लापता थे। उसी दिन रात करीब साढ़े नौ बजे पुलिस ने पेंट शॉप से एक जला शव बरामद किया था। तभी कयास लगाए जा रहे थे कि शव अवनीश का हो सकता है। पुष्टि अगले दिन अपराह्न साढ़े तीन बजे डीसीपी महेश्वर दयाल ने की।
मूल रूप से अवनीश एजी कॉलोनी, कडरू, रांची के रहने वाले थे। वह दिल्ली के मालवीय नगर स्थित शिवालिक पार्क में रहते थे। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर दीपक माथुर ने बताया था कि अवनीश के दोनों पैर टूटे थे। उनके पेट व सिर में भी चोट थी। इससे पता चलता है कि उनकी बेरहमी से पिटाई की गई थी। लेकिन मौत आग में जलने से हुई।