संपत्ति की खातिर ससुर सहित चार ससुरालियों की बेरहमी से हत्या करने के बाद 16 महीने से आरोपी दामाद नरेंद्र कॉलोनी में बेखौफ होकर ऐसे रह रहा था कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। चार हत्याएं करने और उनको घर में ही ठिकाने लगाने के लिए नरेंद्र ने अपने किराएदार विजय गंगवार को संपत्ति में आधा हिस्सा देने का लालच देकर अपने साथ मिला लिया था। पूरे प्रकरण में आरोपी नरेंद्र की पत्नी भी शक के दायरे में है। चार हत्याएं करने और उन्हें गड्ढा खोदकर ठिकाने लगाने में दोनों आरोपियों को कुछ छह घंटे लगे।
मूल रूप से बरेली के थाना देवरनिया के ग्राम खेड़ासराय और हाल ट्रांजिट कैंप की राजा कॉलोनी निवासी नरेंद्र गंगवार ने लीलावती से वर्ष 2008 में लव मैरिज की थी। इसके बाद वह ससुर हीरालाल के घर पर ही वर्ष 2015 तक किराए पर रहा था। पूछताछ में नरेंद्र ने बताया था कि ससुर अकसर उससे अलग रहने को कहते थे। अन्य ससुराली भी उसे ताना दिया करते थे।
इसके बाद उसने ससुर के मकान के सामने ही जमीन लेकर मकान बना लिया था। नरेंद्र की दोनों सालियां भी संपत्ति में उसका (नरेंद्र) हक नहीं होने की बात कहा करती थी। ससुर हीरालाल की पैगा नगरी मीरगंज बरेली स्थित तीन बीघा जमीन और मकान था, जिसे नरेंद्र अपने नाम करना चाहता था लेकिन ससुर सहित चार ससुरालियों के जिंदा रहते यह संभव नहीं था।
इसके बाद नरेंद्र ने संपत्ति को हथियाने के लिए किरायदार विजय गंगवार के साथ मिलकर साजिश रची और सास, ससुर और दो सालियों की बेरहमी से हत्याएं कर दी। नरेंद्र और विजय ने चार की हत्या करने के बाद शवों को एक कमरे में लाकर रख दिया। इसके बाद दोनों ने अंदर से दरवाजों बंद कर छत पर जाने वाली सीढ़ी के पास खुदाई शुरू की। छह फीट की खुदाई को करने में उन्हें चार घंटे का समय लगा।
इसके बाद शवों को गड्ढे में डालने समेत ऊपर से प्लास्तर करने में कुल छह घंटे लगे। गड्ढे के नीचे कट्टे बिछाने के बाद ऊपर से भी कट्टों से ढक दिया गया। करीब सवा साल बीत जाने के बाद भी चारों शव पूरी तरह से नहीं गल पाए थे। इधर, पूरे घटनाक्रम से हीरालाल की बेटी लीलावती को जानकारी नहीं होना पुलिस को अखर रहा है। सवाल उठ रहा है कि 16 महीने तक लीलावती के चार परिजन गायब रहे।