क्या कसूर था उसका कि पहले थर्ड डिग्री थी और फिर उसका शरीर गोलियों से छलनी कर डाला। पढ़िए...
सबक सिखाने के लिए दी थर्ड डिग्री, फिर 22 गोलियों से छलनी कर डाला सीना, इतना सा था उसका कसूर
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देहरादून के रायपुर क्षेत्र में तीन जुलाई 2009 को हुए रणवीर एनकाउंटर की कहानी भी दूसरी कई मुठभेड़ों से अलग नहीं थी। दारोगा और रणवीर की कहा-सुनी हुई और बात बढ़ने पर धक्का-मुक्की हो गई। किसी ने इस हंगामे की जानकारी कंट्रोल रूम पर दे दी। पुलिस रणवीर को पकड़कर चौकी ले गई। रणवीर के परिजनों का आरोप है कि यहां पर उसे थर्ड डिग्री देकर टार्चर किया गया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई।
अपना जुर्म छुपाने के लिए पुलिस उसे गाड़ी में डालकर लाडपुर-रायपुर के जंगल में ले गई, जहां पर फर्जी मुठभेड़ की कहानी गढ़कर उसकी हत्या कर दी गई है। इस कहानी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी तस्दीक करती है। रिपोर्ट में कहा गया था कि रणवीर के शरीर में 28 चोटें पाई गई थी। करीब 22 गोलियों रणवीर के सीने में उतार दी गयी थी। इसी हकीकत को आधार बनाकर परिजनों ने पुलिस के खिलाफ जंग लड़ी।
दोपहर के समय पुलिस वायरलेस पर संदेश जारी होता है कि मोटर साइकिल सवार तीन बदमाश आराघर चौकी प्रभारी जीडी भट्ट से सर्विस रिवाल्वर लूटकर भागे हैं। पुलिस ने घेराबंदी कर ललकारा तो बदमाशों ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं। जवाबी फायरिंग में एक बदमाश मारा गया। पुलिस की 29 राउंड फायरिंग में से 22 ने रणवीर के शरीर को छलनी कर दिया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस बहादुरी की पोल पट्टी खोल दी। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह मुठभेड़ उत्तराखंड के लिए बड़ा कलंक बन जाएगी।
उत्तराखंड पुलिस के इतिहास में तीन जुलाई 2009 का दिन काली स्याही से लिखा गया। मसूरी में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के होने के कारण देहरादून में पुलिस अलर्ट पर थी। दोपहर के समय अचानक कंट्रोल रूम से सूचना प्रसारित हुई कि चेकिंग के दौरान आराघर चौकी प्रभारी जीडी भट्ट से बाइक सवार तीन बदमाश सर्विस रिवाल्वर लूटकर ले गए हैं। आसपास के थानों की पुलिस को बदमाशों की घेराबंदी करने को कहा गया। लगातार सूचना मिलती रही कि पुलिस बाइक सवाराें का पीछा कर रही है।