बात नवंबर 1957 की है। जब देहरादून के पीपल मंडी चौराहे पर एक फिएट कार हिचकोले लेकर बंद हो गई। कार चला रहे नरेंद्र स्वरूप मित्तल नीचे उतरे। साथ ही पिछला गेट खुला और अटल बिहारी वाजपेयी भी बाहर निकल आए।देहरादून के व्यापारी नरेंद्र स्वरूप मित्तल के साथ अटल भी कार को धक्का देने लगे। ठीक उसी वक्त बगल से गुजर रहे तांगे पर लाउड स्पीकर से एलान हो रहा था-‘देश के महान नेता अटल बिहारी वाजपेयी दून में। जनसभा में जरूर आएं।’
सड़क पर लाउड स्पीकर से हो रहा था अटल की सभा का एलान और बगल में खुद लगा रहे थे कार को धक्का
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मित्तल उस वक्त डीएवी में बी.कॉम के छात्र थे और अटल परेड मैदान में जनसभा संबोधित करने आए थे। नरेंद्र स्वरूप मित्तल के बेटे भाजपा नेता पुनीत मित्तल बताते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी के बोलने के दिलचस्प अंदाज की वजह से देहरादून के लोग उन्हें ‘प्रोफेसर’ कहा करते थे।
अटल बिहारी वाजपेयी हर साल वीकेंड मनाने मसूरी आते थे। ‘पहले वह घर आते, फिर पिता जी उन्हें छोड़ने मसूरी जात थे। एक हफ्ते के बाद रेलवे स्टेशन छोड़ते थे।’ मसूरी प्रवास के दौरान वह कमीज, पायजामा पहनते। उन्होंने मना किया था कि ‘किसी को मत बताएं कि मैं मसूरी में हूं।’ एक दिन वह दवा की दुकान पर टेबलेट ले रहे थे। तभी दुकानवाले ने उन्हें गौर से देखा और बोला-‘आप अटल जी हैं।’ वह कुछ देर चुप रहे, फिर बोले ‘हां।’
वह अक्सर कहा करते-‘मैं आम आदमी की तरह रहना चाहता हूं।’ मित्तल ने बताया कि उन्होंने 30 बार अटल को दून से मसूरी पहुंचाया। 1985 में मसूरी से लौटते वक्त अटल ने ऋषिकेश जाने की इच्छा जताई। बोले-किसी को बताना मत, मेरी इच्छा है कि दुकान पर खड़े होकर चाट खाऊं।’
जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो नरेंद्र स्वरूप मित्तल पूरे परिवार के साथ उन्हें बधाई देने पहुंचे। पहले वैयक्तिक सहायक, फिर भाजपा नेता प्रमोद महाजन ने कहा कि आज मुलाकात नहीं हो सकती। इस पर मित्तल ने अपना विजिटिंग कार्ड और बधाई संदेश पहुंचाने का अनुरोध किया। जैसे ही उन्होंने सुनाया और मित्तल परिवार को अंदर बुलाया। खुशी से सबकी आंखें नम हो गईं।