{"_id":"5bac9957867a557ec31fba24","slug":"tourist-places-in-lucknow-to-visit","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"विश्व पर्यटन दिवस : यहां भूलभुलैया में दीवारों के भी हैं कान, ये एक दरवाजा ले जाएगा 'जन्नत' तक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व पर्यटन दिवस : यहां भूलभुलैया में दीवारों के भी हैं कान, ये एक दरवाजा ले जाएगा 'जन्नत' तक
टीम डिजिटल, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 27 Sep 2018 02:20 PM IST
विज्ञापन
lucknow tourism
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भूलभुलैया तो आपने खूब घूमा होगा लेकिन भूलभुलैया की दीवारों के भी कान, शायद ही कभी देखा और सुना होगा। लेकिन, ये हकीकत आपको नवाबों की नगरी में देखने को मिलेगी। वहीं, 'जन्नत दरवाजा' की अद्भुत बात आपको जरूर हैरत में डाल देगी। जी हां, ऐसे ही रोमांच और अद्भुत कलाकृतियों का शहर है लखनऊ। विश्व पर्यटन दिवस पर आज हम आपको बताते हैं कि ऐतिहासिक पर्यटन की दृष्टि से लखनऊ कितनी बेहतरीन जगह है।
rumi gate
- फोटो : amar ujala
ये रूमी गेट है तुर्की स्टाइल का
चौक की टीले वाली मस्जिद से कारवां शुरू करते हैं। फिर नवाब आसिफउद्दौला द्वारा बनवाए बड़ा इमामबाड़ा से होते हुए ये मार्ग भव्य रूमी दरवाजे तक जाता है। इस दरवाजे को भी आसिफउद्दौला ने ही बनवाया था। तुर्की स्टाइल में बना रूमी गेट, लीनिंग टावर ऑफ पीसा की तरह नजर आता है। इसके बाद घंटाघर जिस पर लगी है हवा का रुख बताने वाली भारी-भरकम धातु की चिड़िया, गोआ के पुर्तगाली चर्चों की डिजाइन में बने छोटे इमामबाड़े और बादशाह अली शाह बहादुर की बनवाई भव्य व विशालकाय मस्जिद जो कि इस्ताम्बुल के ब्लू मास्क से किसी भी लिहाज में कम खूबसूरत नहीं है। इसके सातों गुम्बदों की नक्काशी देखते ही बनती है।
चौक की टीले वाली मस्जिद से कारवां शुरू करते हैं। फिर नवाब आसिफउद्दौला द्वारा बनवाए बड़ा इमामबाड़ा से होते हुए ये मार्ग भव्य रूमी दरवाजे तक जाता है। इस दरवाजे को भी आसिफउद्दौला ने ही बनवाया था। तुर्की स्टाइल में बना रूमी गेट, लीनिंग टावर ऑफ पीसा की तरह नजर आता है। इसके बाद घंटाघर जिस पर लगी है हवा का रुख बताने वाली भारी-भरकम धातु की चिड़िया, गोआ के पुर्तगाली चर्चों की डिजाइन में बने छोटे इमामबाड़े और बादशाह अली शाह बहादुर की बनवाई भव्य व विशालकाय मस्जिद जो कि इस्ताम्बुल के ब्लू मास्क से किसी भी लिहाज में कम खूबसूरत नहीं है। इसके सातों गुम्बदों की नक्काशी देखते ही बनती है।
bara imambara
- फोटो : amar ujala
भूलभुलैया की कलाकारी तो देखिए
नवाब आसिफउद्दौला द्वारा बनवाया गया बड़ा इमामबाड़ा यानी भूलभुलैया की कलाकारी देख आप दांतों तले अंगुली दबा लेंगे। यहां दीवारों के भी कान हैं। मतलब, अगर आपने कोई बात कही तो कुछ दूरी पर खड़े व्यक्ति को दीवार में कान लगाने पर आसानी से सुनाई पड़ती है। वहीं, अगर एक छोर पर किसी ने कागज फाड़ा या माचिस जलाई तो दूसरे छोर पर खड़े व्यक्ति को भी सुनाई देगी।
नवाब आसिफउद्दौला द्वारा बनवाया गया बड़ा इमामबाड़ा यानी भूलभुलैया की कलाकारी देख आप दांतों तले अंगुली दबा लेंगे। यहां दीवारों के भी कान हैं। मतलब, अगर आपने कोई बात कही तो कुछ दूरी पर खड़े व्यक्ति को दीवार में कान लगाने पर आसानी से सुनाई पड़ती है। वहीं, अगर एक छोर पर किसी ने कागज फाड़ा या माचिस जलाई तो दूसरे छोर पर खड़े व्यक्ति को भी सुनाई देगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
rumi gate
- फोटो : amar ujala
‘बाजियों’ का अड्डा
पुराना शहर ‘बाजियों’ के लिए भी जाना जाता है। मसलन, पतंगबाजी, मुर्गबाजी, तीतरबाजी, कबूतरबाजी वगैरह। बताया जाता है कि आम आदमी ही नहीं नवाब भी यहां आकर इन बाजियों का लुत्फ उठाते थे। यहीं बना है तीसरी सदी का वाटर टैंक। इसके अतिरिक्त कोनेश्वर शिवजी का प्राचीन मंदिर, जहां ऋषि कौटिल्य ने यज्ञ किया और उन्हीं की प्रेरणा से कौटिल्य घाट (कुड़ियाघाट) बना, जहां होने वाली आरती बनारस के घाटों पर होने वाली आरती जैसी ही प्रसिद्घ थी।
पुराना शहर ‘बाजियों’ के लिए भी जाना जाता है। मसलन, पतंगबाजी, मुर्गबाजी, तीतरबाजी, कबूतरबाजी वगैरह। बताया जाता है कि आम आदमी ही नहीं नवाब भी यहां आकर इन बाजियों का लुत्फ उठाते थे। यहीं बना है तीसरी सदी का वाटर टैंक। इसके अतिरिक्त कोनेश्वर शिवजी का प्राचीन मंदिर, जहां ऋषि कौटिल्य ने यज्ञ किया और उन्हीं की प्रेरणा से कौटिल्य घाट (कुड़ियाघाट) बना, जहां होने वाली आरती बनारस के घाटों पर होने वाली आरती जैसी ही प्रसिद्घ थी।
विज्ञापन
lucknow tourism
- फोटो : amar ujala
जन्नत दरवाजा से गुजरकर तो देखिए
निजामिया और फुरकानिया दो एजुकेशनल हब थे पुराने लखनऊ के। निजामिया में आज भी अकबर और औरंगजेब केफरमान टंगे हैं। साथ ही महात्मा गांधी, जिन्ना सहित तमाम मशहूर हस्तियों के लेटर आज भी टंगे हैं। यहीं से आगे जाने पर है नेपाली कोठी, जहां दवाओं का संसार है। कुछ दूरी पर है जन्नत दरवाजा, कहा जाता है इस एक फीट चौड़े दरवाजे से कितना भी मोटा आदमी हो, आसानी से गुजर सकता है। वॉक का सफर करीब 11 बजे चौक चौराहे पर राजा ठंडाई वाले की दुकान पर खत्म होता है।
निजामिया और फुरकानिया दो एजुकेशनल हब थे पुराने लखनऊ के। निजामिया में आज भी अकबर और औरंगजेब केफरमान टंगे हैं। साथ ही महात्मा गांधी, जिन्ना सहित तमाम मशहूर हस्तियों के लेटर आज भी टंगे हैं। यहीं से आगे जाने पर है नेपाली कोठी, जहां दवाओं का संसार है। कुछ दूरी पर है जन्नत दरवाजा, कहा जाता है इस एक फीट चौड़े दरवाजे से कितना भी मोटा आदमी हो, आसानी से गुजर सकता है। वॉक का सफर करीब 11 बजे चौक चौराहे पर राजा ठंडाई वाले की दुकान पर खत्म होता है।