कोरोना वायरस के संक्रमण के पीछे ज्योतिषी ग्रहों की युति और राशियों के प्रभाव बता रहे हैं। शनि व राहु की स्थिति इस महामारी को फैलाने में मददगार बन रही है। शनि का मकर राशि में होना इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
प्रयागराज के ज्योतिषियों का मानना है कि मेष राशि में सूर्य के प्रवेश केबाद ही इस बीमारी का अंत होगा। इस बार 14 अप्रैल को सूर्य मेष राशि की कक्षा में प्रवेश करेंगे। यानी अभी कम से कम 20 दिन से अधिक इस वायरस के बचाव के लिए जतन करने होंगे।
इस बार 25 मार्च से शुरू हो रहे नव संवत्सर का नाम प्रमादी है। प्रमादी नाम नव संवत्सर राष्ट्र व समाज में भय और व्याकुलता पैदा करने वाला होगा। प्रमादी नव संवत्सर के राजा बुध और मंत्री चंद्रमा होंगे। जबकि इससे पूर्व के संवत का राजा शनि इन दिनों मकर राशि में मौजूद है। ज्योतिषीय फलादेश के अनुसार राहु व शनि को महामारियों के संक्रमण व वायु जनित बीमारियों का कारक माना जाता है।
इन्हीं ग्रहों के प्रभाव केचलते यह बीमारी फैली है। शनि के मकर राशि में होने के कारण इसका प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार सूर्य 14 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मौजूदा समय राहु अपनी उच्च राशि मिथुन में गोचर कर रहा है। मिथुन राशि वायु तत्व राशि है और राहु के प्रभावकारी होने की वजह कोरोना वायरस का विस्तार वायु व नमी में तेजी से हो रहा है।
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मेष राशि
- फोटो : aries sign
सूर्य के मकर पर आने के साथ ही इसका प्रभाव कम हो जाएगा। छह मई को आनंद संवत शुरू होने के साथ ही इस महामारी पूर्ण रूप से नष्ट हो जाएगी। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार सूर्य ग्रहण के प्रभाव के बाद बीते 31 दिसंबर 2019 से इस वायरस के संक्रमण ने जन्म लिया था।
इसके बाद गुरु और केतु की युति से इसमें वृद्धि हो गई। राहु मिथुन राशि में और केतु धनु राशि में हैं। ग्रहों की इस दशा के प्रभाव कम होने से 24 मार्च से इस स्थिति में सुधार आरंभ हो जाएगा। इसके बाद 30 मार्च को गुरु के मकर राशि में प्रवेश करते ही परिस्थिति बदलने लगेगी।