भतीजे ने शहीद भगत सिंह से जुड़े कई ऐसे सच उजागर किए हैं, जिनके बारे में न कभी किसी से सुना होगा और न ही कहीं पढ़ें होंगे, जानिए।
2 of 9
भगत सिंह के भतीजे जगमोहन सिंह
शहीद भगत सिंह की मां की चाह थीं कि बेटे की अकेली मूर्त कहीं न लगे
भगत सिंह के भतीजे व लेखक डा. जगमोहन सिंह ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकार जुपिंदरजीत सिंह द्वारा लिखी किताब 'डिस्कवरी ऑफ शहीद भगत सिंह पिस्टल एंड हिज अहिंमसाज्' को लांच करने आए थे। यहां उन्होंने बताया कि उनकी नानी और शहीद भगत सिंह की मां की इच्छा थी कि देश में शहीद की अकेले मूर्त न लगे, जहां भी लगे वह तीनों की एक साथ लगे, जिसे अब पूरे देश में करने की मांग कर रहे हैं।
3 of 9
bhagat singh
- फोटो : सोशल मीडिया
जगमोहन सिंह ने सवाल उठाया कि भगत सिंह ने 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जेपी सॉन्डर्स को मारने के लिए क्या सही मायने में 32 कोल्ट पिस्टल का प्रयोग किया था, या ब्रिटिश पुलिस ने इसको शहीद भगत सिंह को फांसी पर चढ़ाने के लिए झूठा सबूत बनाकर प्रयोग किया। इस पिस्टल के प्रयोग को लेकर आज भी संदेह बना हुआ है। इसकी पुष्टि ब्रिटिश पुलिस ने कैसे की थी, यह सवाल भी उठता है।
4 of 9
bhagat singh
- फोटो : अमर उजाला
अगर यह पिस्टल शहीद भगत सिंह ने सॉन्डर्स को मारने के लिए प्रयोग की तो सुखदेव की पिस्टल क्यों ब्रिटिश पुलिस खोज नहीं पाई। क्या लाहौर में 17 दिसंबर, 1928 को 32 कोल्ट पिस्टल से ही जेपी सॉन्डर्स को मारा गया था। इनकी जांच होनी चाहिए। जगमोहन सिंह ने बधाई देते हुए लेखक जुपिंदरजीत सिंह की तारीफ की और कहा कि इस किताब के जरिए शहीद भगत सिंह की अहिंसा विचारधारा को बयां किया है, जिससे युवाओं को ओर प्रेरणा मिलेगी।
लेखक ने अमेरिका में बनी 32 कोल्ट पिस्टल के 86 साल के सफर को इस किताब में पिरोया है, जिसे ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जेपी सॉन्डर्स को मारने के लिए 17 दिसंबर, 1928 को इस्तेमाल में लाया गया था। साथ ही ये पक्ष भी रखा गया है कि कैसे शहीद भगत सिंह शायद महात्मा गांधी की तुलना में अहिंसा के एक अधिक मजबूत प्रचारक थे। लेखक ने बताया कि नवंबर 2016 में शहीद की खोई हुई पिस्टल की खोज के बाद इस किताब का विचार विकसित हुआ।