कुश्ती देश का पुराना खेल है। इसे फिल्मों से नहीं, ओलंपिक में मेडल हासिल करने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। दंगल फिल्म तो मेडल लाने के बाद बनी है। पहले इसका कोई जिक्र तक नहीं किया गया। अमर उजाला से बातचीत के दौरान कुश्ती में ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने यह नाराजगी जाहिर की।
'दंगल फिल्म तो बाद में बनी, मेडल से मिली कुश्ती को पहचान'
वह मंगलवार को चंडीगढ़ में आयोजित पहले कैशलेस दंगल में शिरकत करने यहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि आज के समय में फिल्में केवल उन्हीं खिलाड़ियों पर बनती हैं, जो मेडल लाते हैं। पदक जीतने के लिए खिलाड़ियों को मेहनत करनी पड़ पड़ती है। मेडल लाने के बाद ही सरकार उन पर ध्यान देती है।
उसके पहले कोई खिलाड़ियों को बेहतरीन व्यवस्था देने की बात नहीं करता है। योगेश्वर दत्त ने बताया कि देश के पहलवानों ने ओलंपिक में तीन बार पदक हासिल किया। इसके बाद कुश्ती को पूरे देश में एक अलग पहचान मिली है। उन्होंने कहा की कुश्ती अब सिर्फ गांवों का खेल नहीं रह गया है। अब यह शहरों समेत विश्व में अपना स्थान रखता है।
कैशलेस दंगल को सराहा
पहलवान योगेश्वर दत्त ने कहा कि प्रधानमंत्री की कैशलेस योजना को चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से अमल किया जाना बेहतरीन है। दंगल में पहली बार ऑनलाइन पहलवानों को पेमेंट की गई। यह अच्छा है। इससे देशभर में कैशलेस के साथ कुश्ती का प्रचार भी होगा। युवा नशा छोड़ कुश्ती को ओर अग्रसर हो, मेरी यही आज के युवाओं से अपील है।
क्रेडिट और एटीएम कार्ड करें प्रयोग
योगेश्वर ने कहा कि लोगों को क्रेडिट कार्ड और एटीएम कार्ड का प्रयोग करना चाहिए। कुश्ती में भारत का भविष्य अच्छा है और कई युवा खिलाड़ी उभरकर सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी कुश्ती में दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि कुश्ती अब गांव का खेल नहीं रह गया।