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पहलवान फौजी दादा की पहलवान बेटी से मिलिए, ओलंपियन को चटाई धूल

Sun, 08 Jan 2017 09:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा) Updated Sun, 08 Jan 2017 09:47 AM IST
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wrestler nirmala boora defeated olympian wrestler of colombia in pro wrestling league, full profile
हरियाणा की पहलवान निर्मला बूरा
ओलंपिक पद​क विजेता को रिंग में धूल चटाकर फौजी पहलवान दादा का नाम रोशन करने वाली इस रेसलर से मिलिए। कहानी बेहद दिलचस्प है।
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हरियाणा की पहलवान निर्मला बूरा
हरियाणा के हिसार में घिराय गांव में जन्मी पहलवान निर्मला बूरा के फौजी दादा प्रताप सिंह बूरा भी पहलवान थे। कुश्ती के दौरान हादसा हुआ। गर्दन पर चोट लगी और प्रताप सिंह बचाए नहीं जा सके थे। पर दादाजी के कुश्ती प्रेम के किस्से सुनकर ही निर्मला बूरा बड़ी हुई। निर्मला घिराय गांव में कबड्डी खेलती थी।
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हरियाणा की पहलवान निर्मला बूरा
निर्मला ने हिसार में गीतिका जाखड़ को कुश्ती करते देखा तो खून में मौजूद पहलवानी जोर मारने लगी, लेकिन परिवार ने कुश्ती करने से रोका। कभी दादाजी के साथ हुए हादसे के बहाने तो कभी गांववालों के तानों के कारण। कहते थे, लड़की होकर पहलवानी करेगी क्या। मां किताबो देवी को मनाना मुश्किल था।
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हरियाणा की पहलवान निर्मला बूरा
पर निर्मला बूरा ने जिद नहीं छोड़ी। उसे सबसे ज्यादा हौसला मिला बड़े दादाजी भजन सिंह बूरा से। किसान पिता ईश्वर सिंह बताते हैं- मेरे ताऊजी निर्मला को मेरे पिता के किस्से सुनाते थे। अगर हमने उसे कुश्ती करने से रोका तो वह उसे खेलने भेज देते थे। किस्मत भी हौसले का साथ देती है। निर्मला ने 2001 में कुश्ती को गंभीरता से लिया और इसी साल राष्ट्रीय कुश्ती में वह चैंपियन बन गई।
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हरियाणा की पहलवान निर्मला बूरा
दुबली पतली होने के कारण कोच सतबीर पंढाल और सुभाष चंद्र ने उससे मांसाहार लेने को कहा मगर उसने भी कह दिया, हमारे लिए दूध दही ही काफी है। पांच साल लगातार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती। 2003 में उसकी उपलब्धियों को सरकार ने भी माना और हरियाणा पुलिस में उसे नौकरी मिल गई।
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