{"_id":"5934ee824f1c1bc4778b4579","slug":"world-environment-day-june-5-hero-of-environment-sant-balbir-singh-seechewal","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"ये हैं 'हीरो आफ एन्वायरन्मेंट', अकेले किया ऐसा काम, मिला पद्मश्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये हैं 'हीरो आफ एन्वायरन्मेंट', अकेले किया ऐसा काम, मिला पद्मश्री
amarujala.com- Written by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 06 Jun 2017 09:16 AM IST
विज्ञापन
संत सीचेवाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर हम आपको सुना रहे हैं, 'हीरो आफ एन्वायरन्मेंट' की कहानी, जिसने अकेले ऐसा काम कर दिखाया कि पद्मश्री अवार्ड मिला।
‘पर्यावरण के हीरो’ के टाइटिल से नवाजे गए संत बलबीर सिंह सीचेवाल
- फोटो : amarujala
हम बात कर रहे हैं, पर्यावरण कार्यकर्ता और सिख धर्मगुरु संत बलबीर सिंह सीचेवाल की। इसी साल इन्हें इनकी उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री अवार्ड से नवाजा। इस शख्स ने अकेले प्रदूषित नदी की सफाई करके मिसाल पेश की।
संत बलबीर सिंह सीचेवाल
पंजाब के होशियारपुर में बनी काली बेई नदी एक समय में बहुत प्रदूषित थी। उसमें नहाना तो छोड़, लोग उसके पास से निकल भी नहीं पाते थे। धीरे धीरे नदी के आसपास बसे 40 गांवों के लोग उसमें कचरा डालने लगे थे, लेकिन संत ने अकेले उसकी सफाई कर दी। सन् 2000 में पर्यावरण कार्यकर्ता बलबीर सिंह सीचेवाल ने इस नदी को साफ करने का काम शुरू किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
पीयू ने बलबीर सिंह सीचेवाल को किया सम्मानित
- फोटो : अमर उजाला
संत ने अपने समर्थक और सहयोगी सेवकों के साथ मिलकर सबसे पहले इसके किनारों का निर्माण किया और नदी के किनारे पर सड़कें बनवाई। लोगों के बीच जनजागृति अभियान चलाया। इसके तहत लोगों से अपना कचरा कहीं और डालने को कहा गया। नदी में मिलने वाले गंदे नालों का रुख मोड़ा गया और नदी के किनारे बसे लोगों को इसकी पवित्रता को लेकर जागरूक किया।
विज्ञापन
बलबीर सिंह सीचेवाल
- फोटो : अमर उजाला
नतीजा, जिस नदी के किनारे खड़े होने पर लोगों को नाक पर रुमाल रखना पड़ता था, आज उसी नदी के किनारे लोग पिकनिक मनाते हैं। काली बेई नदी होशियारपुर जिले में 160 किलोमीटर क्षेत्र में बहती है। यह वही काली बेई नदी है, जिसके किनारे 500 साल पहले गुरु नानक देव को अंतर्ज्ञान प्राप्त हुआ था। यहां से अंतर्ज्ञान प्राप्त होने बाद से ही नानक से गुरु नानक के रूप में पहचाने जाने लगे थे।